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दिल्ली सरकार की नई पुनर्वास नीति: झुग्गीवासियों के लिए पक्के मकान

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने झुग्गीवासियों के लिए नई पुनर्वास नीति 2026 की घोषणा की है, जिससे लगभग 20 लाख लोगों को स्थायी आवास मिलेगा। इस योजना के तहत पात्र परिवारों को एक बेडरूम वाला फ्लैट दिया जाएगा, जिसमें आवश्यक सुविधाएं शामिल होंगी। लाभार्थियों को आर्थिक योगदान देना होगा और कुछ शर्तें भी पूरी करनी होंगी। जानें इस योजना के सभी पहलुओं के बारे में।
 

दिल्ली सरकार की नई योजना

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने झुग्गी-बस्तियों में निवास करने वाले लाखों लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। सरकार ने झुग्गीवासियों को स्थायी आवास प्रदान करने के लिए 2026 की नई पुनर्वास नीति लागू की है। इस योजना से लगभग 20 लाख लोगों को लाभ मिलने की संभावना है, जो दीवाली से पहले एक बड़ी राहत के रूप में सामने आई है।


आवास की योजना

सरकार का लक्ष्य 4 से 5 लाख परिवारों को सुरक्षित और बेहतर आवास प्रदान करना है। नई नीति उन झुग्गी-बस्तियों को कवर करेगी, जो 1 जनवरी 2025 तक अस्तित्व में थीं। दिल्ली में लगभग 675 झुग्गी-बस्तियां हैं, जिनमें रहने वाले पात्र परिवार इस योजना से लाभान्वित हो सकते हैं। नई नीति को 4 नवंबर 2026 को दिल्ली गजट में प्रकाशित किया गया है।


फ्लैट की सुविधाएं

इस योजना के अंतर्गत पात्र परिवारों को एक बेडरूम वाला फ्लैट प्रदान किया जाएगा, जिसका कारपेट एरिया कम से कम 25 वर्ग मीटर होगा। फ्लैट में बेडरूम, लिविंग रूम, रसोई, बाथरूम, शौचालय और बालकनी जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। हालांकि, लाभार्थियों को इन मकानों के लिए आर्थिक योगदान भी देना होगा।


आर्थिक योगदान

सरकार के नियमों के अनुसार, मकान के लिए 1.5 लाख रुपये और अगले पांच वर्षों तक कॉमन एरिया के रखरखाव के लिए 50 हजार रुपये जमा करने होंगे। इस प्रकार, कुल मिलाकर लाभार्थी को 2 लाख रुपये का योगदान देना होगा। इसके अतिरिक्त, बिजली, पानी और अन्य आवश्यक सेवाओं का बिल भी स्वयं चुकाना होगा।


आवेदन की शर्तें

दिल्ली सरकार की इस योजना का लाभ उठाने के लिए कुछ आवश्यक शर्तें निर्धारित की गई हैं। आवेदक को भारतीय नागरिक होना चाहिए और उसकी उम्र कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए। संबंधित परिवार का मकान 1 जनवरी 2025 से पहले किसी पात्र झुग्गी-बस्ती में होना चाहिए। आवेदक का नाम इस तारीख से पहले की मतदाता सूची में होना आवश्यक है।


दस्तावेज़ और सत्यापन

आवेदक को राशन कार्ड, बिजली बिल, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट, बैंक या पोस्ट ऑफिस की पासबुक में से कम से कम एक प्रमाण प्रस्तुत करना होगा। यह दस्तावेज़ निर्धारित तारीख से पहले जारी होना चाहिए और उसी पते का होना आवश्यक है। आवेदक और परिवार के सदस्यों का आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन भी किया जाएगा।


एक परिवार, एक मकान

नई नीति के तहत एक परिवार को सामान्यतः केवल एक ही मकान दिया जाएगा। हालांकि, यदि एक ही झुग्गी में अलग-अलग मंजिलों पर दो स्वतंत्र परिवार रहते हैं और दोनों पात्रता की शर्तें पूरी करते हैं, तो उन्हें अलग-अलग मकान मिल सकता है। सरकार की प्राथमिकता है कि लोगों को उनके पुराने निवास स्थान पर या उसके तीन किलोमीटर के दायरे में ही बसाया जाए।


सख्त नियम और शर्तें

सरकार ने आवास के उपयोग को लेकर सख्त नियम बनाए हैं। आवंटित फ्लैट को पहले 10 वर्षों तक बेचा या किसी अन्य व्यक्ति के नाम ट्रांसफर नहीं किया जा सकेगा। प्रारंभ में मकान लीज के आधार पर दिया जाएगा। 10 साल पूरे होने के बाद, बकाया भुगतान और आवश्यक शर्तें पूरी करने पर मालिकाना हक ट्रांसफर किया जा सकेगा।


नियमों का उल्लंघन

नियमों का उल्लंघन करने पर आवंटन रद्द किया जा सकता है। यदि आवास मिलने के बाद कोई फिर से सरकारी जमीन पर कब्जा करता है, तो फ्लैट रद्द और जब्त किया जा सकता है। जिन लोगों को योजना के लिए अयोग्य घोषित किया जाएगा, उन्हें फैसले के खिलाफ 30 दिनों के भीतर अपील करने का अवसर मिलेगा।