☰
×

दिल्ली हाई कोर्ट ने जिमखाना क्लब मामले में सुनवाई से खुद को अलग किया

दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति प्रतीक जालान ने जिमखाना क्लब से जुड़े एक मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में व्यक्तिगत पहलू महत्वपूर्ण हैं, इसलिए इसे किसी अन्य न्यायाधीश को सौंपा जाना चाहिए। जिमखाना क्लब के सदस्यों और कर्मचारियों ने भूमि एवं विकास कार्यालय के आदेश के खिलाफ मुकदमे दायर किए हैं, जिसमें क्लब को 5 जून तक जमीन खाली करने का निर्देश दिया गया है। केंद्र सरकार ने इन याचिकाओं को खारिज करने की मांग की है। जानें इस मामले में आगे क्या होगा।
 

जस्टिस प्रतीक जालान ने सुनवाई से हटने का निर्णय लिया

दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति प्रतीक जालान ने बुधवार को दिल्ली जिमखाना क्लब से संबंधित एक मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। उन्होंने निर्देश दिया कि 'दिल्ली जिमखाना क्लब लिमिटेड स्टाफ वेल्फेयर एसोसिएशन' द्वारा दायर मामले की सुनवाई शुक्रवार को किसी अन्य पीठ के समक्ष की जाए। न्यायमूर्ति जालान ने स्पष्ट किया कि वह इस मामले की सुनवाई से हट रहे हैं।


व्यक्तिगत पहलुओं के कारण सुनवाई का स्थानांतरण

उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में व्यक्ति को अपने निर्णय पर विश्वास नहीं होता। न्यायमूर्ति जालान ने बताया कि इस मामले में व्यक्तिगत पहलू काफी महत्वपूर्ण हैं, इसलिए यह उचित होगा कि कोई अन्य न्यायाधीश इस मामले की सुनवाई करें।


जमीन खाली करने का आदेश

5 जून तक जमीन खाली करने का निर्देश


जिमखाना क्लब के सदस्य विजय खुराना और दिल्ली जिमखाना क्लब लिमिटेड स्टाफ वेल्फेयर एसोसिएशन ने भूमि एवं विकास कार्यालय (एलएंडडीओ) के 22 मई के आदेश के खिलाफ अलग-अलग मुकदमे दायर किए हैं। इस आदेश में औपनिवेशिक काल के दिल्ली जिमखाना क्लब की स्थायी लीज डीड को रद्द कर दिया गया था। इसके साथ ही क्लब को रक्षा बुनियादी ढांचे को सुरक्षित करने के लिए 5 जून तक जमीन खाली करने का निर्देश दिया गया था।


केंद्र सरकार का जवाब

केंद्र सरकार ने मुख्य मामले में अपने जवाब में कहा है कि सभी याचिकाओं को खारिज किया जाना चाहिए। केंद्र का तर्क है कि तीसरे पक्ष के लोग सरकार और क्लब के बीच समाप्त की गई लीज डीड से जुड़े अधिकारों को लागू करने से अधिकारियों को नहीं रोक सकते। जिमखाना क्लब के कर्मचारियों ने अपनी याचिका में बताया है कि वे क्लब में विभिन्न भूमिकाओं में कार्यरत हैं, जैसे रसोइये, वेटर, सफाई कर्मचारी, माली, और सुरक्षा कर्मी।


कर्मचारियों की सुरक्षा की मांग

नोटिस को रद्द करने की मांग


कर्मचारियों ने अपनी नौकरी और आजीविका की सुरक्षा के साथ-साथ संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(जी) और 21 के तहत मौलिक अधिकारों की रक्षा की मांग की है। उन्होंने केंद्र के 22 मई के नोटिस को रद्द करने की अपील की है, यह कहते हुए कि दिल्ली जिमखाना क्लब उनके लिए केवल मनोरंजन का स्थान नहीं, बल्कि काम करने की जगह भी है।


क्लब सदस्य का विरोध

क्लब के सदस्य विजय खुराना ने अपनी याचिका में कहा है कि रक्षा बुनियादी ढांचे और सुरक्षा के नाम पर केंद्र द्वारा दिए गए कारण अस्पष्ट हैं। उनका आरोप है कि ये कारण केवल क्लब को हटाने का बहाना हैं। खुराना ने यह भी कहा कि यह कदम कानून के अनुसार प्रक्रिया का पालन किए बिना क्लब को जबरन खाली कराने का प्रयास है।


नोटिस के समय से पहले जारी होने का आरोप

अपने अंतरिम आवेदन में विजय खुराना ने कहा है कि 29 जून का नोटिस गलत और समय से पहले जारी किया गया है। उनका कहना है कि इससे मामले के मूल मुद्दे पर भी असर पड़ता है। आवेदन में यह भी कहा गया है कि कारण बताओ नोटिस समय से पहले जारी किया गया, क्योंकि इसमें पहले ही यह मान लिया गया कि जिमखाना क्लब की स्थायी लीज कानूनी रूप से समाप्त हो चुकी है।