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दिल्ली हाई कोर्ट ने न्यूजक्लिक को दी राहत, FDI मामले में खारिज हुए आरोप

दिल्ली हाई कोर्ट ने न्यूजक्लिक और उसके संपादक प्रबीर पुरकायस्थ को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नियमों के उल्लंघन के आरोपों से राहत दी है। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मामलों को खारिज करते हुए कहा कि मूल FIR का जारी रहना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है। इस फैसले से न्यूजक्लिक को बड़ी राहत मिली है, जानें इस मामले का पूरा इतिहास और कोर्ट की टिप्पणियाँ।
 

दिल्ली हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला

दिल्ली हाई कोर्ट ने न्यूज पोर्टल न्यूजक्लिक और इसके संपादक प्रबीर पुरकायस्थ को एक महत्वपूर्ण राहत प्रदान की है। कोर्ट ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नियमों के उल्लंघन के आरोपों से संबंधित दिल्ली पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मामलों को खारिज कर दिया। जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने 29 मई को दिए गए अपने निर्णय में कहा कि दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा दर्ज की गई FIR का जारी रहना कानूनी प्रक्रिया का गंभीर दुरुपयोग है।


कोर्ट का निर्णय

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जब मूल अपराध की FIR समाप्त हो गई है, तो ED द्वारा दायर मामला यानी ECIR भी समाप्त किया जा सकता है। इस प्रकार, न्यूजक्लिक और उसके प्रधान संपादक को इस मामले में बड़ी राहत मिली है।


मामले का इतिहास

यह मामला 2020 में शुरू हुआ, जब दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने न्यूजक्लिक और उससे जुड़े व्यक्तियों के खिलाफ FIR दर्ज की थी। FIR में आरोप लगाया गया था कि न्यूजक्लिक की मूल कंपनी 'पीपीके न्यूजक्लिक स्टूडियो प्राइवेट लिमिटेड' ने विदेशी निवेश कानून का उल्लंघन करते हुए वित्त वर्ष 2018-19 में अमेरिकी कंपनी वर्ल्डवाइड मीडिया होल्डिंग्स एलएलसी से 9.59 करोड़ रुपये का एफडीआई प्राप्त किया, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ।


धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत जांच

इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत जांच शुरू की। ED ने आरोप लगाया कि विदेशी फंडिंग और वित्तीय लेनदेन में अनियमितताएं हुईं, जिन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के दायरे में देखा जाना चाहिए। कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि जब मूल आधार ही टिकाऊ नहीं रहा, तो ED की कार्रवाई अपने आप समाप्त हो जाएगी।


कोर्ट की टिप्पणियाँ

हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि डिजिटल प्रिंट मीडिया का संचालन करने वाली कंपनी के लिए वेतन, परामर्श शुल्क और किराए पर खर्च करना स्वाभाविक है, इसलिए धन हेराफेरी का आरोप विचारणीय नहीं है। कोर्ट ने मामलों को खारिज करते हुए कहा कि ECIR के खारिज होने के बाद उसकी कॉपी मांगने की याचिका भी निरर्थक हो जाती है। इस प्रकार, न्यूजक्लिक और उसके संपादक प्रबीर पुरकायस्थ को राहत मिली है।