दिल्ली हाई कोर्ट ने विनेश फोगाट की अयोग्यता पर WFI को लगाई फटकार
दिल्ली हाई कोर्ट का निर्णय
दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को पहलवान विनेश फोगाट को घरेलू प्रतियोगिताओं में भाग लेने से 'अयोग्य' घोषित करने पर भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) को कड़ी चेतावनी दी। कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह एक विशेषज्ञ पैनल का गठन करे, जो एशियाई खेलों में विनेश की योग्यता का मूल्यांकन करेगा।
कोर्ट की टिप्पणियाँ
मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि डब्ल्यूएफआई का प्रतिष्ठित एथलीटों को प्रतियोगिताओं में भाग लेने की अनुमति देने की पुरानी प्रथा से हटना चिंताजनक है।
विनेश का पक्ष
क्यों कुश्ती को नुकसान उठाना चाहिए?
विनेश ने अदालत से अनुरोध किया कि उन्हें ट्रायल में भाग लेने का अवसर दिया जाए और 9 मई को जारी कारण बताओ नोटिस पर सवाल उठाए। अदालत ने इस नोटिस पर नाराजगी व्यक्त की और पूछा कि क्यों यह नहीं माना जा सकता कि डब्ल्यूएफआई ने उनके लिए चयन मानदंडों में बदलाव किया था।
अदालत की चिंताएँ
अदालत ने कहा कि विनेश एक अंतरराष्ट्रीय स्तर की पहलवान हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि मातृत्व का सम्मान करने वाले देश में किसी व्यक्ति को नुकसान क्यों उठाना चाहिए।
हाई कोर्ट ने कहा, 'सर्कुलर में बदलाव ही सब कुछ स्पष्ट कर देता है। ऐसा व्यवहार न करें, यह खेल के सर्वोत्तम हित में नहीं है।'
मामले का सारांश
मामले की पृष्ठभूमि
डब्ल्यूएफआई ने विनेश फोगाट को 26 जून 2026 तक घरेलू प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए अयोग्य घोषित किया था। इसके बावजूद, विनेश ने गोंडा में आयोजित नेशनल ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट में भाग लिया।
अयोग्यता का कारण बताते हुए संघ ने एंटी-डोपिंग नियमों का हवाला दिया, जिसके अनुसार संन्यास से वापसी करने वाले खिलाड़ियों को छह महीने का नोटिस पीरियड पूरा करना आवश्यक है।
विनेश ने दिल्ली हाई कोर्ट में डब्ल्यूएफआई के आदेश को चुनौती दी, लेकिन एकल पीठ ने चयन ट्रायल में भाग लेने के मामले में तुरंत राहत नहीं दी। बाद में, विनेश ने एकल पीठ के आदेश को भी चुनौती दी।