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दिल्ली हाई कोर्ट से विनेश फोगाट को मिली राहत, एशियाई खेलों के ट्रायल में शामिल होंगी

दिल्ली हाई कोर्ट ने कुश्ती खिलाड़ी विनेश फोगाट को एशियाई खेलों के चयन ट्रायल में भाग लेने की अनुमति दी है। कोर्ट ने कुश्ती महासंघ की शर्तों पर सवाल उठाते हुए कहा कि मातृत्व अवकाश को किसी खिलाड़ी के करियर में बाधा नहीं बनाना चाहिए। इसके साथ ही, केंद्र सरकार को विनेश की फिटनेस का मूल्यांकन करने के लिए एक समिति गठित करने का निर्देश दिया गया है। इस मामले में कोर्ट ने कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां की हैं, जो खेल जगत में चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
 

विनेश फोगाट को मिली अनुमति


दिल्ली उच्च न्यायालय ने कुश्ती खिलाड़ी विनेश फोगाट को एशियाई खेलों के चयन ट्रायल में भाग लेने की अनुमति दे दी है। शनिवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह फैसला सुनाया। भारतीय कुश्ती महासंघ ने उन्हें 26 जून, 2026 तक घरेलू प्रतियोगिताओं में भाग लेने से अयोग्य घोषित कर दिया था। विनेश फोगाट ने जुलाई 2025 में मातृत्व अवकाश लिया था और अब वे प्रतियोगिताओं में वापसी की तैयारी कर रही हैं। हालांकि, महासंघ ने उन्हें नोटिस पीरियड पूरा करने की शर्त रखी थी, जो 26 जून, 2026 को समाप्त होगा।


कोर्ट की फटकार

सुनवाई के दौरान, न्यायालय ने कुश्ती महासंघ को फटकार लगाते हुए कहा कि मातृत्व एक उत्सव है और इसे किसी खिलाड़ी के करियर में बाधा नहीं बनाना चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि मातृत्व का सम्मान होना चाहिए और महासंघ को खिलाड़ियों के प्रति प्रतिशोध की भावना से काम नहीं करना चाहिए।


केंद्र सरकार को समिति बनाने का निर्देश

दिल्ली हाई कोर्ट की खंडपीठ ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया जाए। यह समिति विनेश फोगाट की फिटनेस का मूल्यांकन करेगी और अपनी रिपोर्ट पेश करेगी। रिपोर्ट के आधार पर, उन्हें 30-31 मई को होने वाले एशियाई खेलों के ट्रायल में भाग लेने की अनुमति दी जाएगी।


अनुशासनहीनता के आरोपों पर कोर्ट की टिप्पणी

भारतीय कुश्ती महासंघ ने विनेश फोगाट पर अनुशासनहीनता और एंटी-डोपिंग नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया था। उनके अधिवक्ता ने कहा कि 9 मई को जारी नोटिस में पेरिस ओलंपिक डिस्क्वालिफिकेशन को 'राष्ट्रीय शर्म' बताना पूर्वाग्रह था। इस पर कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की कि खेल की बलि नहीं दी जा सकती और विनेश फोगाट एक अंतरराष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी हैं।