दिल्ली हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय: दिव्यांगता पेंशन पर लाइफस्टाइल डिसऑर्डर का असर नहीं
दिल्ली हाईकोर्ट ने सैनिकों के हक में सुनाया फैसला
दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है, जिसमें कहा गया है कि सशस्त्र बलों के कर्मियों की दिव्यांगता पेंशन को केवल इस आधार पर नहीं रोका जा सकता कि उनकी बीमारी लाइफस्टाइल डिसऑर्डर है या यह पीस एरिया में तैनाती के दौरान हुई है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि गैर-ऑपरेशनल क्षेत्रों में भी सैन्य सेवा तनावपूर्ण होती है, जिससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
पीस पोस्टिंग का महत्व
सैन्य में पीस पोस्टिंग का अर्थ है कि सैनिक या अधिकारी की तैनाती सीमाओं पर नहीं, बल्कि सुरक्षित और शांतिपूर्ण स्थानों पर होती है। जस्टिस वी. कामेश्वर राव और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की बेंच ने आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें भारतीय वायुसेना के एक रिटायर्ड अधिकारी की दिव्यांग पेंशन याचिका खारिज कर दी गई थी। यह अधिकारी हाई ब्लड प्रेशर और कोरोनरी आर्टरी डिजीज से पीड़ित हैं।
बकाया भुगतान का आदेश
याचिकाकर्ता ने भारतीय वायुसेना में 40 वर्षों से अधिक सेवा की थी और उनकी मेडिकल स्थिति ज्वाइनिंग के समय ठीक थी। 1999 में उन्हें हाईपरटेंशन का सामना करना पड़ा और 2016 में गंभीर कोरोनरी आर्टरी डिजीज के कारण ओपन-हार्ट सर्जरी करानी पड़ी। उनकी दिव्यांगता को 50% आंका गया था, फिर भी उन्हें पेंशन से वंचित कर दिया गया। हाईकोर्ट ने उनकी याचिका को मंजूर करते हुए 50% आजीवन दिव्यांग पेंशन देने का आदेश दिया और बकाया भुगतान 8 सप्ताह के भीतर करने का निर्देश दिया। यदि भुगतान में देरी होती है, तो 12% वार्षिक ब्याज देना होगा।