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दिल्ली हाईकोर्ट ने राजपाल यादव को चेक बाउंस मामले में तीन महीने की सजा सुनाई

दिल्ली हाईकोर्ट ने बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को चेक बाउंस के मामले में तीन महीने की जेल की सजा सुनाई है। कोर्ट ने दोनों पक्षों के बीच समझौते की कोशिश की, लेकिन यह असफल रही। राजपाल यादव पर 1 करोड़ 60 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और कोर्ट के फैसले के पीछे की कहानी।
 

दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला

दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने चेक बाउंस के मामले में अभिनेता राजपाल यादव को तीन महीने की जेल की सजा सुनाई है। यह आदेश जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच ने दिया। कोर्ट ने 2 अप्रैल को इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रखा था।


सुनवाई के दौरान, न्यायालय ने दोनों पक्षों के बीच समझौते की कोशिश की, लेकिन यह प्रयास सफल नहीं हो सका। 16 फरवरी को, कोर्ट ने राजपाल यादव को 18 मार्च तक की अंतरिम जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था। हालांकि, 5 फरवरी को हाईकोर्ट ने उन्हें राहत देने से इनकार करते हुए तुरंत सरेंडर करने का निर्देश दिया, जिसके बाद उन्होंने जेल में आत्मसमर्पण कर दिया।


Delhi High Court on Friday upheld the conviction of Bollywood actor Rajpal Yadav in multiple cheque bounce cases, dismissing his challenge to the trial court’s judgment.

(File photo) pic.twitter.com/5MaweTiXlV

— News Media July 10, 2026


राजपाल यादव को कड़कड़डूमा कोर्ट ने चेक बाउंस के मामले में दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी। हालांकि, जून 2024 में हाईकोर्ट ने उनकी सजा को निलंबित कर दिया था, यह कहते हुए कि राजपाल यादव आदतन अपराधी नहीं हैं।


कड़कड़डूमा कोर्ट ने चेक बाउंस केस में राजपाल यादव पर 1 करोड़ 60 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था। उनकी पत्नी राधा पर भी 10 लाख रुपये प्रति केस का जुर्माना लगाया गया था। यह सजा दोनों को चेक बाउंस से जुड़े सात मामलों में सुनाई गई थी।


शिकायतकर्ता मुरली प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड ने कोर्ट को बताया कि राजपाल ने अप्रैल 2010 में फिल्म 'अता पता लापता' के लिए कंपनी से सहायता मांगी थी। 30 मई 2010 को दोनों के बीच एक करार हुआ, जिसके तहत राजपाल यादव की कंपनी को 5 करोड़ रुपये का लोन दिया गया।


इस करार के अनुसार, राजपाल को ब्याज सहित कुल 8 करोड़ रुपये लौटाने थे, लेकिन वह पहली बार यह राशि चुकता नहीं कर सके। इसके बाद, तीन बार करार का नवीनीकरण हुआ। 9 अगस्त 2012 को अंतिम करार में राजपाल यादव ने शिकायतकर्ता को 11 करोड़ 10 लाख 60 हजार 350 रुपये लौटाने की सहमति दी थी, लेकिन उनकी कंपनी यह राशि चुकता करने में असफल रही।


अपने बचाव में, राजपाल यादव ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने मुरली प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड से कोई उधारी नहीं ली थी, बल्कि उन्होंने कंपनी में निवेश किया था। लेकिन कड़कड़डूमा कोर्ट ने उनकी दलील को अस्वीकार करते हुए उन्हें चेक बाउंस का दोषी पाया।