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दूरसंचार क्षेत्र के लिए नए नियम: टीवी चैनलों और रेडियो स्टेशनों पर प्रभाव

सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने दूरसंचार क्षेत्र के लिए नए ड्राफ्ट नियमों की घोषणा की है, जिसमें टीवी चैनलों और रेडियो स्टेशनों के लिए कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश शामिल हैं। इन नियमों के तहत, टीवी चैनलों को राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर कार्यक्रम प्रसारित करने होंगे और प्राइवेट एफएम स्टेशनों को भी इसी तरह के कार्यक्रमों का प्रसारण करना अनिवार्य होगा। जानें इन नियमों के पीछे का कारण और सुझाव देने की अंतिम तिथि के बारे में।
 

नए ड्राफ्ट नियमों की घोषणा

सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने दूरसंचार क्षेत्र के लिए नए ड्राफ्ट नियमों का अनावरण किया है। इन नियमों में टीवी चैनलों और रेडियो स्टेशनों के लिए कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश शामिल हैं। टीवी चैनलों को हर दिन सुबह 6 बजे से रात 11 बजे तक कम से कम 30 मिनट का कार्यक्रम राष्ट्रीय महत्व और सामाजिक प्रासंगिकता वाले विषयों पर प्रसारित करना अनिवार्य होगा।


स्थानीय कार्यक्रमों की अनिवार्यता

इन कार्यक्रमों का 20 प्रतिशत हिस्सा स्थानीय स्तर का होना चाहिए। इसके अलावा, ये स्टेशन अपने श्रोताओं से कोई शुल्क नहीं ले सकेंगे, यानी ये फ्री-टू-एयर रहेंगे। नए नियमों में यह भी उल्लेख किया गया है कि प्रमुख प्रबंधकीय पदों पर नियुक्ति से पहले सुरक्षा मंजूरी आवश्यक होगी। यदि स्वामित्व में बदलाव के कारण प्रमुख प्रबंधन में परिवर्तन होता है, तो सरकार की पूर्व अनुमति लेनी होगी।


प्रसारण की अनिवार्यता

सामाजिक प्रासंगिकता वाले विषयों में शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य, विज्ञान, महिला कल्याण, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रीय एकता शामिल हैं। प्राइवेट एफएम स्टेशनों को हर दिन कम से कम एक घंटे का राष्ट्रीय महत्व वाला कार्यक्रम प्रसारित करना होगा।


टीवी चैनलों के लिए निरंतर प्रसारण

ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, टीवी चैनलों को अपने लाइसेंस की अवधि के दौरान निरंतर प्रसारण करना होगा। यदि कोई चैनल 60 दिनों से अधिक समय तक बंद रहता है, तो सरकार को इसकी सूचना देनी होगी।


90 दिन बंद रहने पर कार्रवाई

यदि कोई चैनल 90 दिनों से अधिक समय तक बंद रहता है, तो उसकी अथॉरिटी समाप्त हो सकती है। नए नियमों के तहत, टीवी चैनलों, टेलीपोर्ट, समुदाय रेडियो और न्यूज एजेंसियों को 10 साल का लाइसेंस दिया जाएगा। प्राइवेट एफएम रेडियो को 15 साल और टीवी चैनल वितरण सेवाओं को 20 साल का लाइसेंस मिलेगा।


सुझाव देने की अंतिम तिथि

यदि इंटरनेट सेवा प्रदाता या मल्टी-सिस्टम ऑपरेटर पहले से रजिस्टर्ड हैं, तो वे विज्ञापन देकर इंटरनेट प्रोटोकॉल टेलीविजन (IPTV) सेवाएं शुरू कर सकेंगे। मंत्रालय ने इन ड्राफ्ट नियमों पर 27 जुलाई तक सुझाव और टिप्पणियां आमंत्रित की हैं।


नियमों में बदलाव का कारण

ये नियम पुराने टेलीग्राफ एक्ट 1885 की जगह टेलीकॉम्यूनिकेशंस एक्ट 2023 के तहत लाए गए हैं। इनमें टीवी, डीटीएच, एचआईटीएस, प्राइवेट एफएम, कम्युनिटी रेडियो और आईपीटीवी जैसी सभी सेवाओं को शामिल किया गया है।