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देवांग गांधी: घरेलू क्रिकेट के सितारे का अंतरराष्ट्रीय सफर

देवांग गांधी, जो भारतीय घरेलू क्रिकेट में एक प्रमुख नाम हैं, ने अपने करियर में कई उपलब्धियाँ हासिल की हैं। हालांकि, उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सीमित अवसर मिले। इस लेख में, हम उनके क्रिकेट करियर, घरेलू क्रिकेट में उनके योगदान और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनके अनुभवों पर चर्चा करेंगे। जानें कैसे उन्होंने बंगाल क्रिकेट को अपनी प्रतिभा से रोशन किया और आज भी क्रिकेट के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
 

देवांग गांधी का क्रिकेट करियर

नई दिल्ली: भारतीय घरेलू क्रिकेट में देवांग गांधी का नाम बड़े आदर के साथ लिया जाता है। हालांकि उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ज्यादा अवसर नहीं मिले, लेकिन उन्होंने लंबे समय तक बंगाल के लिए खेलकर अपनी पहचान बनाई।


देवांग गांधी का जन्म 6 सितंबर 1971 को गुजरात में हुआ। उन्होंने 1994-95 में बंगाल के लिए घरेलू क्रिकेट में कदम रखा। अक्टूबर 1999 में उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने का मौका मिला। टेस्ट क्रिकेट में उनके अच्छे प्रदर्शन के बावजूद, उन्हें सीमित अवसर मिले, जिससे उनका अंतरराष्ट्रीय करियर संक्षिप्त रहा। फिर भी, घरेलू क्रिकेट में उनके लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन ने उन्हें बंगाल क्रिकेट में एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाया।


गांधी ने अक्टूबर 1999 में न्यूजीलैंड के खिलाफ तीन टेस्ट मैचों की श्रृंखला में भारत के लिए डेब्यू किया। अपनी पहली पारी में वह रन नहीं बना सके, लेकिन दूसरी पारी में उन्होंने 75 रन बनाकर अपनी कसर पूरी की। उन्होंने सदागोप्पन रमेश के साथ पहले विकेट के लिए 137 रन की साझेदारी की। इस श्रृंखला में उन्होंने कुल 200 रन बनाए। उनके शानदार प्रदर्शन के कारण उन्हें 1999-2000 के ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए चुना गया। हालांकि, एडिलेड टेस्ट में वह असफल रहे और यह उनका अंतिम टेस्ट साबित हुआ।


देवांग ने 4 टेस्ट मैचों में 7 पारियों में 2 अर्धशतक बनाते हुए 204 रन बनाए, जिसमें उनका सर्वोच्च स्कोर 88 रन था। वहीं, 3 वनडे मैचों में उन्होंने 49 रन बनाए। घरेलू क्रिकेट में, 1994 से 2005 के बीच, उन्होंने 95 प्रथम श्रेणी मैचों में 16 शतकों की मदद से 6,111 रन और 98 लिस्ट ए मैचों में 9 शतकों के साथ 3,402 रन बनाए। संन्यास के बाद भी, गांधी क्रिकेट के क्षेत्र में विभिन्न भूमिकाओं में सक्रिय हैं और भारतीय टीम की चयन समिति के सदस्य भी रह चुके हैं।