धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा: शिक्षा मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल की समीक्षा
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और उसके पीछे की वजह
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा देते हुए एक पत्र जारी किया है, जिसमें उन्होंने अपने निर्णय के कारणों को स्पष्ट किया है। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने चार दशकों के सार्वजनिक जीवन को छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा सुधार के प्रति समर्पित किया है। उनके अनुसार, एक सशक्त, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा प्रणाली ही एक विकसित राष्ट्र की नींव होती है। उन्होंने यह भी कहा कि देश के युवाओं की आकांक्षाओं और भविष्य का सम्मान करना उनका नैतिक कर्तव्य है। इसके साथ ही, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सेवा का अवसर मिलने के लिए आभार व्यक्त किया।
NEET परीक्षा में अनियमितताओं का जिक्र
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पत्र में NEET-UG परीक्षा में हुई अनियमितताओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब परीक्षा में गड़बड़ी की जानकारी मिली, तो केंद्र सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी और परीक्षा को रद्द कर दोबारा कराने का निर्णय लिया। उन्होंने बताया कि भविष्य में परीक्षा को कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में आयोजित करने का निर्णय भी इसी दिशा में उठाया गया कदम है। प्रधान के अनुसार, सरकार की प्राथमिकता 20 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा को निष्पक्ष और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराना था, जिसमें केंद्र, राज्य सरकारों और जिला प्रशासन ने मिलकर काम किया।
जिम्मेदारी स्वीकार करने की बात
अपने इस्तीफे में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उन्होंने शुरू से ही पूरे मामले की जिम्मेदारी ली और कभी पीछे नहीं हटे। उनका कहना है कि सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि किसी भी मेधावी छात्र का भविष्य परीक्षा माफिया के कारण प्रभावित न हो। उन्होंने यह भी कहा कि घोषित परिणामों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के कई प्रतिभाशाली छात्रों ने सफलता प्राप्त की, लेकिन कुछ लोगों ने छात्रों को भ्रमित करने और माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। उन्होंने युवाओं के सपनों और लोकतांत्रिक मूल्यों में अपने अटूट विश्वास को दोहराया।
छात्र आंदोलन और राष्ट्रहित का संदर्भ
अपने त्यागपत्र के अंत में, धर्मेंद्र प्रधान ने जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शनों और देशभर में बने माहौल का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पिछले दस दिनों की घटनाओं से वे व्यक्तिगत रूप से आहत रहे, लेकिन इसे अपनी प्रतिष्ठा का नहीं, बल्कि राष्ट्रहित का विषय माना। उन्होंने कहा कि वे नहीं चाहते थे कि देश विरोधी ताकतें मौजूदा हालात का फायदा उठाएं या छात्रों का भविष्य कानूनी विवादों में उलझे। उन्होंने विद्यार्थियों को आंदोलन और विवादों के बजाय पढ़ाई और करियर पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी। इसी सोच के साथ उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंपने का निर्णय लिया।