धर्मेंद्र प्रधान का शिक्षा मंत्रालय से विदाई: एक नई शुरुआत की संभावना
धर्मेंद्र प्रधान की विदाई
धर्मेंद्र प्रधान नरेंद्र मोदी सरकार के चौथे शिक्षा मंत्री के रूप में कार्यरत थे, और उनकी विदाई एक बार फिर से चर्चा का विषय बन गई है। पिछले तीन मंत्रियों की विदाई सम्मानजनक नहीं रही, और न ही उनके बाद किसी का पुनर्वास हुआ। 2014 में जब सरकार बनी, तो स्मृति ईरानी पहली शिक्षा मंत्री बनीं, जिनका शिक्षा में कोई खास रिकॉर्ड नहीं था। अटल बिहारी वाजपेयी के समय में डॉक्टर मुरली मनोहर जोशी शिक्षा मंत्री थे, जिन पर हमेशा यह आरोप लगा कि उन्होंने शिक्षा का भगवाकरण किया।
स्मृति ईरानी के बाद प्रकाश जावडेकर को शिक्षा मंत्री बनाया गया, जो लगभग तीन साल तक इस पद पर रहे। इसके बाद रमेश पोखरियाल निशंक को यह जिम्मेदारी सौंपी गई, लेकिन वे भी शिक्षा मंत्रालय से हटने के बाद राजनीतिक परिदृश्य से गायब हो गए। अब धर्मेंद्र प्रधान की विदाई के बाद शिक्षा मंत्रालय में नए मंत्री की नियुक्ति को लेकर चिंता जताई जा रही है।
धर्मेंद्र प्रधान ओडिशा से लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं, इसलिए वे 2029 तक सांसद बने रहेंगे। अब यह देखना होगा कि उनका पुनर्वास नई दिल्ली में होगा या ओडिशा में। शिक्षा मंत्रियों के इस तरह के हालात को देखते हुए नए मंत्री बनने की इच्छा रखने वालों में संकोच हो सकता है।