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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की चर्चा: शिक्षा मंत्रालय में बदलाव की संभावना

हाल ही में धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफे की चर्चा हो रही है, जिसके बाद डॉक्टर जितेंद्र सिंह को उनकी जगह पर नियुक्त किया जा सकता है। प्रहलाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का प्रभार सौंपा गया है। इस बदलाव के पीछे कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन और यूजीसी के दिशानिर्देशों के कारण अगड़ी जाति के लोगों की नाराजगी है। जानें इस मुद्दे पर सरकार की क्या योजना है और आगे क्या हो सकता है।
 

शिक्षा मंत्रालय में संभावित बदलाव


हाल ही में यह चर्चा उठी थी कि धर्मेंद्र प्रधान शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे सकते हैं, जिसके बाद डॉक्टर जितेंद्र सिंह को उनकी जगह पर नियुक्त किया जा सकता है। यह अनुमान इस आधार पर लगाया गया था कि वे कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन में सक्रिय थे। प्रधानमंत्री आवास के सामने राहुल गांधी के प्रदर्शन के दौरान भी उन्होंने राहुल से बातचीत की थी। इसके बाद जब कॉकरोच जनता पार्टी ने वार्ता शुरू की, तो उन्हें भी इसमें शामिल किया गया। पहले दौर की वार्ता जेपी नड्डा ने की थी, लेकिन यह बेनतीजा रही।


हालांकि, जब प्रधान ने इस्तीफा दिया, तो शिक्षा मंत्रालय का प्रभार प्रहलाद जोशी को सौंपा गया। इसके बावजूद, पेपर लीक और नकल रोकने के लिए लाए गए संविधान संशोधन बिल को जितेंद्र सिंह ने सदन में पेश किया है। इस पर वे विस्तार से चर्चा करेंगे, और यह भी कहा जा रहा है कि अमित शाह भी इस विषय पर बोलेंगे।


ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार ने पहले से ही तय कर लिया था कि यदि धर्मेंद्र प्रधान विदा होते हैं, तो किसी अगड़ी जाति के नेता को शिक्षा का प्रभार सौंपा जाएगा। इसी कारण जितेंद्र सिंह का नाम चर्चा में आया और प्रहलाद जोशी को अतिरिक्त प्रभार मिला। संसद के मानसून सत्र के बाद मंत्रिमंडल में फेरबदल में जोशी को शिक्षा मंत्री बनाया जा सकता है। यदि ऐसा नहीं होता है, तो जितेंद्र सिंह को यह जिम्मेदारी दी जा सकती है। यह कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन का एक महत्वपूर्ण सबक है।


असल में, यूजीसी द्वारा कैंपस में समानता के नाम पर दिए गए दिशानिर्देशों के बाद अगड़ी जाति के लोग नाराज हो गए थे। उन्होंने सोशल मीडिया पर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है। जब सरकार को कॉकरोच जनता पार्टी और 'जेन जी' आंदोलन के दौरान युवाओं के नैरेटिव को काउंटर करने की आवश्यकता पड़ी, तब उसका सिस्टम विफल हो गया। पहले अगड़ी जाति के साइबर योद्धा खामोश हो गए या आंदोलन के साथ हो गए। यूजीसी के दिशानिर्देशों के बाद सरकार का सोशल मीडिया में पहला बचाव टूट गया है। इसलिए अब माहौल को सुधारने का प्रयास किया जा रहा है।