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धार्मिक आस्था के नाम पर धोखाधड़ी: नहेरा शेख का 5,978 करोड़ का घोटाला

नहेरा शेख, 'हीरा ग्रुप ऑफ कंपनीज' की संस्थापक, पर 5,978 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप है। उन्होंने शरीयत कानून का हवाला देकर निवेशकों से पैसे जुटाए और बाद में भारी धोखाधड़ी की। प्रवर्तन निदेशालय ने उनकी संपत्तियां जब्त की हैं और जांच जारी है। जानें इस मामले की पूरी कहानी और नहेरा की गिरफ्तारी के पीछे की सच्चाई।
 

धोखाधड़ी का सनसनीखेज मामला


नई दिल्ली: एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जिसमें धार्मिक विश्वासों का सहारा लेकर लोगों की मेहनत की कमाई को ठगा गया है। 'हीरा ग्रुप ऑफ कंपनीज' की संस्थापक नहेरा शेख पर गंभीर आरोप हैं कि उन्होंने शरीयत कानून का हवाला देकर निवेशकों से लगभग 5,978 करोड़ रुपये जुटाए और इसके बाद 3,000 करोड़ रुपये का बड़ा घोटाला किया। प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, इस पोंजी स्कीम ने देशभर में 172,000 से अधिक मुस्लिम निवेशकों को निशाना बनाया, जो ब्याज-मुक्त हलाल निवेश के अवसर की तलाश में थे।


शरीयत कानून के नाम पर धोखे का जाल

इस्लामी मान्यताओं के अनुसार, बैंकों से ब्याज लेना निषिद्ध है। नहेरा शेख ने इसी भावना का लाभ उठाते हुए 'हीरा ग्रुप' के तहत एक निवेश योजना शुरू की। निवेशकों को यह आश्वासन दिया गया कि उनके पैसे का उपयोग ऐसे व्यवसायों में किया जाएगा जो पूरी तरह से शरीयत के सिद्धांतों का पालन करते हैं और इससे 36 प्रतिशत का भारी वार्षिक लाभ होगा। शुरुआत में कुछ चुनिंदा निवेशकों को भारी रिटर्न देकर विश्वास हासिल किया गया, जिससे लाखों लोगों ने अपनी जीवनभर की बचत इस कंपनी में निवेश कर दी।


संपत्तियों की जब्ती

प्रवर्तन निदेशालय ने अब तक 'हीरा ग्रुप' और नहेरा शेख से संबंधित 400 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां जब्त की हैं। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत पीड़ितों को मुआवजा दिलाने के लिए इन संपत्तियों की नीलामी की प्रक्रिया चल रही है। इस पहल के तहत कुछ संपत्तियों की नीलामी से लगभग 122 करोड़ रुपये पहले ही प्राप्त किए जा चुके हैं।


नहेरा के ठिकानों पर छापेमारी

एजेंसी द्वारा नहेरा के ठिकानों पर छापेमारी के दौरान 12 लग्ज़री वाहन, जिनमें BMW और Mercedes-Benz शामिल हैं, और 92 लाख रुपये नकद बरामद किए गए। इस मामले में उनके एक सहयोगी को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है, जिस पर प्रधानमंत्री कार्यालय का अधिकारी बनकर जांच में हस्तक्षेप करने का आरोप है। प्रवर्तन निदेशालय इस वित्तीय घोटाले के सभी पहलुओं की जांच कर रहा है।


अदालतों को गुमराह करने की कोशिश

सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनकी जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद नहेरा पिछले एक महीने से फरार थीं। उन्होंने जांच एजेंसियों और अदालतों को गुमराह करने की लगातार कोशिशें कीं। उन्होंने एक विशेष अदालत में एक झूठा हलफनामा भी दायर किया, जिसमें दावा किया गया कि उन्होंने हैदराबाद पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने की कोशिश की थी, लेकिन पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेने से इनकार कर दिया।


गैर-जमानती वारंट जारी

जब अदालत ने जेल प्रशासन से इस दावे की पुष्टि की, तो यह पूरी तरह से मनगढ़ंत निकला, जिसके बाद अदालत ने एक गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया। जांच से बचने के लिए नहेरा शेख अपनी पहचान छिपाकर गुरुग्राम के सेक्टर 45 में रह रही थीं। उन्हें प्रवर्तन निदेशालय और हरियाणा पुलिस द्वारा चलाए गए एक संयुक्त अभियान के दौरान गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के समय, वह एक किराए के मकान में छिपी हुई थीं और एक फर्जी पहचान पत्र के माध्यम से 'शेख खमर जहां' बनकर रह रही थीं।