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नई दवा नियम: बिना डॉक्टर की प्रिस्क्रिप्शन के नहीं मिलेगा कफ सिरप

केंद्र सरकार ने दवा नियमों में बदलाव करते हुए कफ सिरप की बिक्री को डॉक्टर की प्रिस्क्रिप्शन से जोड़ दिया है। यह निर्णय मध्य प्रदेश में हुए एक गंभीर मामले के बाद लिया गया है, जिसमें दूषित सिरप के कारण बच्चों की मौत हुई थी। नए नियमों के तहत, सिरप केवल लाइसेंस प्राप्त दवा दुकानों पर ही बेचा जा सकेगा, यहां तक कि 1,000 से कम आबादी वाले गांवों में भी। जानें इस बदलाव के पीछे की वजह और इसके संभावित प्रभाव।
 

कफ सिरप की बिक्री पर नए नियम लागू


नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने दवा नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। अब कफ सिरप को बिना डॉक्टर की प्रिस्क्रिप्शन के नहीं खरीदा जा सकेगा। यह निर्णय सिरप को उन दवाओं की सूची से हटाने के बाद लिया गया है, जिन्हें सीधे दवा की दुकानों से खरीदा जा सकता था। सरकार का मानना है कि इससे सिरप आधारित दवाओं की गुणवत्ता और निगरानी में सुधार होगा।


सख्त नियमों का पालन अनिवार्य

सिरप के निर्माताओं और विक्रेताओं को अब लाइसेंसिंग और गुणवत्ता नियंत्रण से संबंधित कड़े नियमों का पालन करना होगा। मध्य प्रदेश में अक्टूबर 2025 में हुए एक मामले में दूषित सिरप के कारण 26 बच्चों की मौत के बाद यह कदम उठाया गया है।


1,000 से कम आबादी वाले गांवों में भी नियम लागू

नए नियमों के तहत, ड्रग्स रूल्स, 1945 की अनुसूची में संशोधन किया गया है। पहले, 1,000 से कम आबादी वाले गांवों में कफ सिरप की बिक्री के लिए कुछ छूट थी, लेकिन अब यह छूट समाप्त कर दी गई है। ऐसे गांवों में भी कफ सिरप केवल लाइसेंस प्राप्त दवा दुकानों से ही बेचा जा सकेगा।


सरकार ने सुझाव मांगे थे

मंत्रालय ने इस बदलाव से पहले 29 दिसंबर 2025 को एक मसौदा अधिसूचना जारी की थी, जिसमें आम लोगों और संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां मांगी गई थीं। नियमों में संशोधन से पहले, देश की प्रमुख तकनीकी सलाहकार संस्था से भी परामर्श किया गया था।


कानूनी प्रावधानों का उपयोग

केंद्र सरकार ने ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 की धारा 12 और 33 के तहत अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए यह बदलाव किया है। ड्रग्स रूल्स, 1945, इस एक्ट के तहत बनाए गए हैं और ये भारत में दवाओं के निर्माण, बिक्री और वितरण को नियंत्रित करते हैं।