नए साल के पहले शुक्रवार का महत्व और मां लक्ष्मी की पूजा के उपाय
नए वर्ष का पहला शुक्रवार और मां लक्ष्मी
साल 2026 की शुरुआत में आज का दिन नए वर्ष का पहला शुक्रवार है। हिंदू संस्कृति में शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी, जो धन और समृद्धि की देवी मानी जाती हैं, को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस दिन किए गए विशेष उपाय पूरे वर्ष आर्थिक स्थिरता और सकारात्मकता बनाए रखने में सहायक होते हैं.
पहले शुक्रवार का महत्व
धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि जिस ऊर्जा के साथ वर्ष की शुरुआत होती है, उसका प्रभाव लंबे समय तक बना रहता है। ज्योतिषाचार्य पं. रविकांत शास्त्री के अनुसार, पहले शुक्रवार को लक्ष्मी पूजन करने से मानसिक संतुलन और आर्थिक निर्णयों में सकारात्मकता आती है। इतिहास में भी व्यापारियों और गृहस्थों ने नए साल की शुरुआत में लक्ष्मी साधना की परंपरा को अपनाया है ताकि पूरे वर्ष आय के स्रोत स्थिर रहें.
मां लक्ष्मी की कृपा पाने के उपाय
1. सफेद वस्तुओं से लक्ष्मी पूजन
मां लक्ष्मी को सफेद रंग और कमल पुष्प प्रिय होते हैं। पहले शुक्रवार को लक्ष्मी नारायण मंदिर जाकर या घर पर श्रद्धा से पूजा करें। भोग में मिश्री माखन या खीर अर्पित करें और कमल का फूल चढ़ाएं। इससे शुक्र ग्रह की स्थिति मजबूत होती है.
2. मुख्य द्वार पर घी का दीपक
शुक्रवार की शाम घर के मुख्य द्वार पर गाय के घी का दीपक जलाएं। दीपक में थोड़ी सी केसर या एक इलायची डालना शुभ माना जाता है। इससे नकारात्मक ऊर्जा कम होती है और घर में सकारात्मक वातावरण बनता है.
3. श्रीयंत्र का अभिषेक
श्रीयंत्र को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। पहले शुक्रवार को दूध और गंगाजल से श्रीयंत्र का अभिषेक करें। नियमित पूजा से आर्थिक अस्थिरता और अनावश्यक खर्चों में कमी आती है.
4. कनकधारा स्तोत्र का पाठ
शुक्रवार को कनकधारा स्तोत्र का पाठ करना अत्यंत शुभ माना गया है। यदि पाठ संभव न हो, तो शांत मन से इसका श्रवण भी फलदायी होता है. यह स्तोत्र धन प्रवाह को निरंतर बनाए रखने में सहायक है.
5. कन्या पूजन और दान
इस दिन 7 या 11 छोटी कन्याओं को सफेद रंग की मिठाई खिलाएं और उनका आशीर्वाद लें। शास्त्रों में कन्याओं को मां लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है, और यह परंपरा सेवा और संवेदनशीलता का भाव विकसित करती है.
आधुनिक जीवन में परंपरा का महत्व
आधुनिक जीवन में आर्थिक अनिश्चितता के बीच ये परंपराएं अनुशासन, सकारात्मक सोच और संतुलन बनाए रखने में मदद करती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पूजा और ध्यान से मानसिक स्पष्टता बढ़ती है, जिससे बेहतर वित्तीय निर्णय लिए जा सकते हैं.
आगे की दिशा
धार्मिक उपायों के साथ-साथ बजट योजना, बचत और निवेश पर ध्यान देना भी आवश्यक है। परंपरा और आधुनिक सोच का संतुलन स्थायी समृद्धि की कुंजी है.