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नकली दवाओं के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में जनहित याचिका दायर

उच्चतम न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें नकली दवाओं के निर्माण और बिक्री पर रोक लगाने की मांग की गई है। याचिका में त्वरित जांच और सुनवाई की आवश्यकता पर जोर दिया गया है, साथ ही एक राष्ट्रीय डिजिटल निगरानी प्रणाली की स्थापना की सिफारिश की गई है। यह याचिका देश में स्वास्थ्य के अधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम है।
 

नकली दवाओं पर अंकुश लगाने की मांग


देश में नकली और मिलावटी दवाओं के निर्माण और बिक्री पर रोक लगाने के लिए उच्चतम न्यायालय में एक जनहित याचिका प्रस्तुत की गई है। इसमें एक एकीकृत राष्ट्रीय ढांचे की स्थापना, मामलों की त्वरित जांच और सुनवाई, जब्त दवाओं की अनिवार्य फॉरेंसिक जांच, और नकली दवा सिंडिकेट के खिलाफ प्रवर्तन एजेंसियों के बीच समन्वय की मांग की गई है।


अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर इस याचिका में यह भी अनुरोध किया गया है कि नकली दवाओं से संबंधित मामलों की जांच तीन महीने के भीतर और अदालती सुनवाई एक वर्ष के भीतर पूरी की जाए। इसके साथ ही, छापेमारी और जब्ती की प्रक्रिया को अनिवार्य वीडियोग्राफी के साथ करने का सुझाव दिया गया है।


याचिका में एक राष्ट्रीय डिजिटल निगरानी प्रणाली की स्थापना की सिफारिश की गई है, जिससे मामलों की एफआईआर से लेकर अंतिम निर्णय तक की निगरानी की जा सके। यह प्रणाली राज्य पुलिस, सीबीआई, ईडी, सीमा शुल्क विभाग और फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में मदद करेगी।


याचिकाकर्ता ने यह भी मांग की है कि नकली दवाओं के उत्पादन, वितरण और वित्तपोषण में शामिल नेटवर्क के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग, बेनामी संपत्ति और काले धन से संबंधित कड़े कानूनों के तहत कार्रवाई की जाए। याचिका में यह तर्क दिया गया है कि मौजूदा औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 संगठित सिंडिकेट से निपटने के लिए अपर्याप्त है।


बेंगलुरु के 90 से अधिक अस्पतालों में कैंसर की नकली दवाओं की आपूर्ति के हालिया मामलों और जहरीले कफ सिरप से हुई मौतों का उल्लेख करते हुए याचिका में कहा गया है कि यह समस्या केवल अलग-अलग घटनाओं के रूप में नहीं देखी जानी चाहिए, बल्कि यह एक संगठित अपराध है। यह संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और स्वास्थ्य का अधिकार), अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 47 (लोक स्वास्थ्य में सुधार का राज्य का कर्तव्य) का उल्लंघन है।