नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा और पोई के स्वास्थ्य लाभ
मां कात्यायनी की पूजा का महत्व
नई दिल्ली: नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की विशेष पूजा की जाती है। उन्हें शक्ति, साहस और ओज की देवी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आयुर्वेद में भी इस दिन का महत्वपूर्ण स्थान है। आयुर्वेदिक ग्रंथ मार्कंडेय पुराण के अनुसार, देवी दुर्गा के नौ रूपों का संबंध नौ दिव्य औषधियों से है। इसी क्रम में छठे दिन की देवी मां कात्यायनी का संबंध पोई नामक औषधीय पौधे से जोड़ा जाता है, जिसे संस्कृत में उपोदिका कहा जाता है।
पोई के औषधीय गुण
पोई एक अत्यंत उपयोगी, वाजीकारक और त्रिदोषनाशक जड़ी-बूटी है। यह केवल एक साग नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए वरदान है। इसका स्वाद मधुर और तासीर शीतल होती है, जो कफ और पित्त को नष्ट करने में सहायक है। यह बल और वर्ण को बढ़ाने के साथ-साथ रुचि उत्पन्न करती है।
स्वास्थ्य पर प्रभाव
पोई की तासीर बेहद शीतल होती है, जो शरीर की आंतरिक गर्मी को शांत करती है। यह हाथ-पैरों में जलन, पित्त विकार और एसिडिटी जैसी समस्याओं में लाभकारी है। यह पेट को ठंडक पहुंचाती है और आंतों की सफाई में मदद करती है।
तनाव और चिंता में राहत
आयुर्वेद के अनुसार, पोई का सेवन मस्तिष्क की नसों को शांत करता है। यह तनाव, चिंता और अनिद्रा जैसी समस्याओं को दूर करने में मददगार है। नींद न आने की शिकायत वाले लोगों के लिए यह एक प्राकृतिक औषधि के रूप में कार्य करती है।
पोषण तत्वों से भरपूर
पोई में आयरन, कैल्शियम, विटामिन ए, विटामिन सी और फोलेट प्रचुर मात्रा में होते हैं। यह शरीर में हीमोग्लोबिन के स्तर को बढ़ाती है और एनीमिया को दूर करती है। इसके नियमित सेवन से इम्यूनिटी भी मजबूत होती है।
त्वचा के लिए फायदेमंद
मां कात्यायनी ओज और सौंदर्य की प्रतीक हैं। पोई का सेवन रक्त को शुद्ध करता है, जिससे चेहरे पर प्राकृतिक चमक आती है। यह कील-मुहांसे, दाद-खुजली और अन्य त्वचा संबंधी विकारों को दूर करने में भी सहायक है।