×

नवीन जयहिंद का शिक्षा सदन के बाहर धरने का ऐलान

नवीन जयहिंद, जो 2020 में पीटीआई पद पर चयनित हुए थे, अब पंचकूला में शिक्षा सदन के बाहर धरना देने की योजना बना रहे हैं। उनका आरोप है कि उन्हें ज्वाइनिंग नहीं दी गई है, जबकि उनके खिलाफ दर्ज मामलों की स्थिति हर छह महीने में पूछी जाती है। जयहिंद ने अधिकारियों से अंतिम बार मिलने का निर्णय लिया है और इसके बाद कोर्ट का रुख करने की बात कही है। उनके संघर्ष और ज्वाइनिंग न मिलने की वजह जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें।
 

नवीन जयहिंद का धरना


2020 में चयन के बावजूद ज्वाइनिंग नहीं मिली
Naveen Jaihind, रोहतक: जयहिंद सेना के संयोजक नवीन जयहिंद अब पंचकूला में शिक्षा सदन के बाहर धरना देने की योजना बना रहे हैं। उनका आरोप है कि 2020 में पीटीआई पद पर चयन होने के बावजूद उन्हें ज्वाइनिंग नहीं दी गई है। शिक्षा विभाग ने उनकी ज्वाइनिंग पर रोक लगा रखी है, और हर छह महीने में उनके मामले का स्टेटस पूछा जाता है, लेकिन ज्वाइनिंग नहीं दी जाती।


आर-पार की लड़ाई का मन बना चुके हैं जयहिंद

नवीन जयहिंद ने कहा है कि वे अधिकारियों से अंतिम बार मिलेंगे और इसके बाद कोर्ट का रुख भी कर सकते हैं। उन्होंने अपने फेसबुक पेज पर ज्वाइनिंग न मिलने की पीड़ा साझा की है। उल्लेखनीय है कि नवीन जयहिंद 2020 में पीटीआई टीचर भर्ती में चयनित हुए थे, जिनका जॉइनिंग लेटर भी जारी हुआ था, लेकिन बाद में इसे वापस ले लिया गया।


शिक्षा सदन पर जयहिंद की नाराजगी

नवीन जयहिंद ने कहा, "हरियाणा का शिक्षा सदन मुझे पिछले 5 साल से परेशान कर रहा है। मैंने दस बार चक्कर लगाए हैं, लेकिन मुझे नौकरी नहीं दी जा रही है।" उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, जब तक किसी केस में सजा नहीं होती, तब तक किसी को नौकरी देने से मना नहीं किया जा सकता।


वकील की फीस का संकट

जयहिंद ने बताया कि हर छह महीने में उनके से कोर्ट केस के बारे में पूछा जाता है, और इस दौरान एक और केस भी लग जाता है। उन्होंने कहा कि उनके पास हाईकोर्ट के वकील की फीस देने के लिए पैसे नहीं हैं, और फ्री में कोई वकील भी नहीं मिलता।


सीएम और शिक्षामंत्री को टैग किया

उन्होंने सवाल उठाया कि क्या जानबूझकर उन्हें परेशान किया जा रहा है। जयहिंद ने सीएम और शिक्षा मंत्री को टैग करते हुए पूछा कि क्या अब उन्हें धरने पर बैठना चाहिए।


जयहिंद के खिलाफ दर्ज मामले

नवीन जयहिंद के खिलाफ हरियाणा में लगभग 12 मामले दर्ज हैं, जिनमें से अधिकांश रोहतक जिले से संबंधित हैं। सामाजिक मुद्दों पर लड़ाई के दौरान उनके खिलाफ ये मामले दर्ज हुए हैं। पहला केस 2005 में दर्ज हुआ था, जिसमें वे बरी हो चुके हैं।