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नागपुर में श्रद्धा दुबे की गिरफ्तारी: शिवा हत्याकांड में मुख्य आरोपी

मॉडल श्रद्धा दुबे को नागपुर में पुलिस ने गिरफ्तार किया है। वह शिवा शर्मा हत्याकांड की मुख्य आरोपी हैं और लंबे समय से फरार थीं। पुलिस ने उनकी जानकारी देने पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। श्रद्धा का दावा है कि यह हत्या नहीं, बल्कि आत्महत्या का मामला है। इस मामले में उनकी बहन और ड्राइवर भी गिरफ्तार हुए हैं। जानें इस हत्याकांड की पूरी कहानी और पुलिस की कार्रवाई के बारे में।
 

श्रद्धा दुबे की गिरफ्तारी

मॉडल श्रद्धा दुबे को नागपुर में पुलिस ने गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स की टीम द्वारा स्थानीय पुलिस के सहयोग से की गई। श्रद्धा, शिवा हत्याकांड के बाद से फरार थी, और पुलिस ने उसकी जानकारी देने पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था।


श्रद्धा दुबे का कहना है कि यह हत्या नहीं, बल्कि आत्महत्या का मामला है। वह इस हत्याकांड की मुख्य आरोपी मानी जा रही हैं। पुलिस ने कई दिनों तक उसकी तलाश की, और पहले यह खबर आई थी कि वह नेपाल भाग गई है, लेकिन अंततः उसे नागपुर से पकड़ा गया।


गिरफ्तारी की विस्तृत जानकारी

नागपुर में मंगलवार को लखनऊ पुलिस और उत्तर प्रदेश एसटीएफ की संयुक्त टीम ने श्रद्धा दुबे, उनकी बहन रश्मि दुबे और ड्राइवर तनवीर अली उर्फ दानिश को गिरफ्तार किया। ये गिरफ्तारियां कैफे मालिक शिवा शर्मा की मौत के मामले में हुईं।


शिवा शर्मा हत्याकांड का विवरण

28 वर्षीय शिवा शर्मा की मौत 9 अक्टूबर को लखनऊ के हजरतगंज इलाके में हुई थी, जब वह अवध ग्रीन अपार्टमेंट्स की चौथी मंजिल से गिरे। उनकी मां रंजना शर्मा ने श्रद्धा दुबे और अन्य के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कराया है, जिसकी जांच चल रही है।


आरोपियों की फरारी

तीनों आरोपी 9 अक्टूबर से फरार थे। पुलिस ने उनकी तलाश उत्तर प्रदेश के बाहर भी की। प्रारंभ में यह संदेह था कि श्रद्धा दुबे बहराइच जिले के रुपैदिहा बॉर्डर से नेपाल चली गई होंगी। बाद में वह आगरा पहुंची और वहां से नागपुर की उड़ान भरी। इन 11 दिनों में उनके ठिकाने की पूरी जानकारी अभी तक सामने नहीं आई है।


श्रद्धा दुबे का बयान

श्रद्धा दुबे ने एक वीडियो इंटरव्यू में हत्या के आरोपों से इनकार किया। उन्होंने कहा कि शिवा शर्मा ने आत्महत्या की थी और पुलिस को अपार्टमेंट के सीसीटीवी फुटेज की जांच करनी चाहिए। उन्होंने सोशल मीडिया पर कई वीडियो भी साझा किए, जिससे पुलिस के लिए उन्हें ढूंढना कठिन हो गया।


पुलिस ने कई दिनों तक उनकी तलाश की और गैर-जमानती वारंट जारी किए। हर आरोपी के लिए इनाम 25 हजार से बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दिया गया। इस देरी के कारण पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे।


डीसीपी (सेंट्रल) विक्रांत वीर को डीजीपी मुख्यालय से अटैच कर दिया गया, हजरतगंज थाने के एसएचओ विक्रम सिंह को हटाया गया और एसीपी रजनीश वर्मा को क्राइम ब्रांच में स्थानांतरित किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी इस मामले की हैंडलिंग से असंतुष्ट बताए गए।