नासा के आर्टेमिस मिशन से चांद और पृथ्वी की अद्भुत झलक
चांद के करीब पहुंचते नासा का आर्टेमिस मिशन
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का आर्टेमिस मून मिशन चांद के निकट पहुंचते ही नई और रोचक जानकारियों के साथ पृथ्वी की एक अनोखी झलक प्रस्तुत कर रहा है। इस संदर्भ में एस्ट्रोनॉट क्रिस विलियम्स ने सोशल मीडिया पर पृथ्वी के 20 करोड़ साल पुराने मैनिकौगन क्रेटर की तस्वीर साझा की।
क्रिस विलियम्स ने एक्स प्लेटफॉर्म पर एक दिलचस्प पोस्ट में चंद्रमा और पृथ्वी के गड्ढों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे आर्टेमिस II का क्रू चांद के करीब पहुंचेगा, उन्हें चांद की सतह का अद्भुत दृश्य देखने को मिलेगा। खास बात यह है कि चांद की दूसरी तरफ कई गड्ढे नजर आएंगे, जो सौर मंडल के इतिहास में क्षुद्रग्रहों और उल्कापिंडों के टकराव से बने हैं। ये गड्ढे हमारे सौर मंडल के इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि पृथ्वी पर भी कई टकराव हुए हैं, जिनका गहरा प्रभाव पड़ा। उदाहरण के लिए, डायनासोर के युग के अंत में एक बड़े टकराव ने इन जीवों के विलुप्त होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हालांकि, पृथ्वी पर प्लेट टेक्टोनिक्स, मौसम और ज्वालामुखी गतिविधियों ने अधिकांश पुराने गड्ढों को मिटा दिया है, जिससे पृथ्वी के टकराव का इतिहास स्पष्ट नहीं दिखता। चांद हमें इस पूरी कहानी को समझने में मदद करता है।
विलियम्स ने बताया कि पृथ्वी पर कई गड्ढे मौजूद हैं, लेकिन वे चांद के गड्ढों की तरह स्पष्ट नहीं होते। कुछ गड्ढे जैसे कनाडा के क्यूबेक में स्थित मैनिकौगन क्रेटर को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से आसानी से देखा जा सकता है। यह गड्ढा लगभग 20 करोड़ साल पहले बना था, जब एक 5 किलोमीटर चौड़े क्षुद्रग्रह ने पृथ्वी से टकराया था। आज यह गड्ढा 70 किलोमीटर से भी ज्यादा चौड़ा है।
क्रिस ने अपनी पोस्ट में उल्लेख किया कि जब वे व्यायाम कर रहे थे, तब उन्होंने आईएसएस के कूपोला खिड़की से इस गड्ढे का अद्भुत दृश्य देखा। यह दृश्य इतना आकर्षक था कि उन्होंने अपनी कसरत रोककर इसकी तस्वीर खींची।