×

नीट परीक्षा 2026: पेपर लीक के मामले में चौंकाने वाले खुलासे

नीट परीक्षा 2026 के पेपर लीक विवाद में राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए हैं। जांच में पता चला है कि परीक्षा से पहले ही छात्रों के एक बड़े समूह तक प्रश्नों का संग्रह पहुंच गया था। एसओजी ने यह भी बताया कि व्हाट्सएप के जरिए साझा किए गए गेस पेपर में से कई सवाल सीधे परीक्षा में पूछे गए। इस मामले में सीकर और चूरू के छात्रों का भी नाम सामने आया है। एसओजी अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है।
 

जयपुर में नीट परीक्षा का पेपर लीक विवाद

जयपुर: नीट परीक्षा 2026 के पेपर लीक का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) द्वारा की गई जांच में कुछ चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जो पूरे परीक्षा प्रणाली पर सवाल खड़े कर रहे हैं। एसओजी की जांच में यह पता चला है कि परीक्षा से पहले ही एक बड़े समूह के छात्रों तक प्रश्नों का एक बड़ा संग्रह पहुंच गया था। जांच एजेंसी का दावा है कि 720 अंकों की इस परीक्षा में लगभग 600 अंकों के सवाल पहले से ही कुछ छात्रों के पास मौजूद थे। एसओजी अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़कर असली मास्टरमाइंड तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।


व्हाट्सएप के जरिए साझा किया गया 'क्वेश्चन बैंक'


एसओजी की जांच के अनुसार, नीट परीक्षा का यह कथित गेस पेपर या क्वेश्चन बैंक व्हाट्सएप और अन्य मैसेजिंग ऐप्स के माध्यम से बड़े पैमाने पर साझा किया गया था। पुलिस को मिले कई दस्तावेजों में 'फॉरवर्डेड मेनी टाइम्स' का टैग भी मिला है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह सामग्री बड़ी संख्या में छात्रों तक पहुंची थी। जांच में यह भी सामने आया है कि यह गेस पेपर फोटोकॉपी की दुकानों पर भी आसानी से उपलब्ध था और इसे व्यापक रूप से बांटा गया।


300 सवालों में से 150 सीधे परीक्षा में शामिल हुए


पुलिस की गहन जांच में यह पता चला है कि छात्रों को बांटे गए दस्तावेजों में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के 300 से अधिक हाथ से लिखे हुए सवाल शामिल थे। जांच एजेंसियों के अनुसार, इनमें से लगभग 150 सवाल सीधे नीट परीक्षा में हूबहू पूछे गए। हर सवाल के चार अंक होने के हिसाब से कुल मिलाकर लगभग 600 अंकों के प्रश्न इस 'गेस पेपर' से मेल खा गए, जिसने इस राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा की पवित्रता को पूरी तरह से प्रभावित किया है।


सीकर और चूरू से जुड़े पेपर लीक के तार


सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस क्वेश्चन बैंक को सबसे पहले चूरू के एक युवक ने भेजा था, जो वर्तमान में केरल के एक मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है। बताया जा रहा है कि वहां से यह संदिग्ध सामग्री सीकर के एक पीजी संचालक तक पहुंची और फिर उसने इसे छात्रों के बीच बांट दिया। इसके बाद यह कई अन्य छात्रों तक भी वायरल हो गई। एसओजी अब इस पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने के लिए गहराई से जांच कर रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि यह सामग्री सबसे पहले किसने तैयार की थी और इसे फैलाने में कौन-कौन से सफेदपोश शामिल हैं। संदिग्धों के सोशल मीडिया चैट, कॉल लॉग और डिजिटल रिकॉर्ड को खंगाला जा रहा है, जिससे जल्द ही इस रैकेट के कुछ और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।