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नीट पेपर लीक पर छात्रों का आंदोलन जारी, अभिजीत दीपके ने किसानों से मांगा समर्थन

नई दिल्ली में नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के खिलाफ छात्रों का आंदोलन जारी है। 'कॉकरोच जनता पार्टी' के संस्थापक अभिजीत दीपके ने किसानों से समर्थन मांगा है, यह कहते हुए कि छात्र हमेशा किसानों के अधिकारों के लिए खड़े रहे हैं। प्रदर्शन में सैकड़ों युवा शामिल हुए, लेकिन पुलिस ने उन्हें स्थल खाली करने के लिए कहा। दीपके ने छात्रों से जंतर-मंतर आने और प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है। उन्होंने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को भी दोहराया है। जानें इस आंदोलन की पूरी कहानी।
 

जंतर-मंतर पर छात्रों का प्रदर्शन


नई दिल्ली में, नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के खिलाफ छात्रों का आंदोलन जंतर-मंतर पर जारी है। इस आंदोलन के दूसरे दिन, 'कॉकरोच जनता पार्टी' के संस्थापक अभिजीत दीपके ने किसानों से समर्थन मांगा। उन्होंने कहा कि छात्र हमेशा किसानों के अधिकारों के लिए खड़े रहे हैं और अब उन्हें एकजुटता की आवश्यकता है।


शनिवार को इस विरोध में सैकड़ों युवा शामिल हुए, लेकिन शाम होते ही पुलिस ने उन्हें स्थल खाली करने के लिए कहा। पुलिस ने बताया कि सभा के लिए दी गई अनुमति शाम पांच बजे समाप्त हो गई थी।


दीपके और अन्य प्रदर्शनकारी रात भर वहीं रहे और धरना जारी रखा। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को भी दोहराया। दीपके ने छात्रों से जंतर-मंतर आने की अपील की और नीट पुनर्परीक्षा देने वाले छात्रों को प्रदर्शन में शामिल होने के लिए प्रेरित किया।


दिल्ली पुलिस ने कहा कि प्रदर्शन के लिए दी गई अनुमति की समयसीमा समाप्त हो गई है, फिर भी प्रदर्शन जारी रहा। दीपके ने पुलिस से एक अलग स्थल आवंटित करने की मांग की है, लेकिन तब तक वे जंतर-मंतर पर धरना जारी रखेंगे।


उन्होंने 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए पुलिस से अपील की कि प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर आने से न रोका जाए, क्योंकि वे केवल न्याय की मांग कर रहे हैं। दीपके ने अधिकारियों से सार्वजनिक शौचालयों में पानी की आपूर्ति बहाल करने का भी अनुरोध किया।


हालांकि, बाद में दीपके ने बताया कि पीने के पानी की आपूर्ति बहाल कर दी गई और बत्तियां भी चालू कर दी गईं। प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर नारेबाजी करते रहे। दीपके ने कहा कि उनका विरोध शांतिपूर्ण रहेगा और बातचीत के लिए रास्ते खुले हैं यदि जवाबदेही तय की जाए।