नेपाल में बालेन शाह सरकार के खिलाफ युवाओं का उग्र प्रदर्शन
काठमांडू में विरोध की लहर
काठमांडू: नेपाल में बालेन शाह की सरकार के खिलाफ युवाओं का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। पिछले वर्ष जनरेशन जेड के प्रदर्शन के बाद, युवाओं ने केपी शर्मा ओली की सरकार को हटा दिया था। इसके बाद, बालेन शाह के नेतृत्व में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने चुनाव में शानदार जीत हासिल की और वह प्रधानमंत्री बने। वर्तमान में, उनके पास नेपाली संसद में दो-तिहाई बहुमत है।
जनता का गुस्सा
हालांकि, अब बालेन शाह को जनता के भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। रविवार को सैकड़ों लोग प्रधानमंत्री और उनकी नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतर आए। राजधानी के सिंहदरबार सचिवालय के बाहर लोगों की भीड़ इकट्ठा हुई, जिनके हाथों में पोस्टर्स थे, जिन पर लिखा था 'गरीबों पर जुल्म बंद करो, मानवाधिकार का सम्मान करो, गैर-कानूनी गिरफ्तारी रोको और बेघर लोगों को रहने का जगह दो।'
विरोध का कारण
नेपाल में बालेन सरकार के खिलाफ गुस्सा क्यों है?
काठमांडू में हो रहे प्रदर्शनों का मुख्य कारण बालेन शाह का नदी किनारे अवैध बस्तियों को हटाने का निर्णय है। जब वह काठमांडू के मेयर थे, तब से वह इस कार्य को पूरा करना चाहते थे। ये लोग, जिनके पास देश में कहीं और जमीन नहीं है, 'कब्जेदार' कहलाते हैं। 2022 की एक रिपोर्ट के अनुसार, काठमांडू घाटी के तीन जिलों में लगभग 3,466 परिवार अनौपचारिक रूप से बसे हुए हैं।
बेदखली अभियान
बालेन शाह अब इन कब्जेदारों को हटाने के लिए अभियान चला रहे हैं। उन्होंने नदी किनारे बसी बस्तियों के आस-पास बड़ी संख्या में पुलिस और सेना तैनात की है। इसके परिणामस्वरूप, कई लोग अपनी मर्जी से स्थान छोड़ रहे हैं, लेकिन इससे कई बुजुर्ग और बच्चे बेघर हो गए हैं।
कानून का उल्लंघन
नेपाली कानून का उल्लंघन कर रहे बालेन शाह
नेपाल के कानून के अनुसार, बेघरों को हटाने से पहले उन्हें किसी अन्य स्थान का विकल्प देना आवश्यक है, लेकिन बालेन सरकार ने ऐसा नहीं किया। बेदखली अभियान के दौरान 2,600 परिवारों के घर तोड़े गए, जिनमें से केवल 325 परिवारों को अस्थायी होल्डिंग सेंटर में रहने की जगह दी गई है।
प्रदर्शनकारियों की मांग
प्रदर्शनकारियों ने हाल ही में बेदखली की कार्रवाई के दौरान विस्थापित परिवारों के लिए उचित बसावट और पुनर्वास की मांग की। 'यूनाइटेड नेशनल स्क्वाटर्स फ्रंट' के बैनर तले प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सरकार ने बिना उचित विकल्प दिए लोगों के घर गिरा दिए हैं।
गिरफ्तारी और थर्ड डिग्री का आरोप
प्रदर्शनकारियों ने कई लोगों की गिरफ्तारी और उन पर थर्ड डिग्री के इस्तेमाल का आरोप लगाया है। उन्होंने पिछले प्रदर्शनों के दौरान हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं की रिहाई की भी मांग की।