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नेपाल सरकार का नया संघीय सिविल सेवा विधेयक: नौकरी के नियमों में बदलाव

नेपाल सरकार ने संघीय सिविल सेवा में सुधार के लिए एक नया विधेयक पेश किया है, जिसमें सेवानिवृत्ति की उम्र को 60 वर्ष करने, भर्ती प्रक्रिया में बदलाव और कर्मचारियों की राजनीतिक गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। यह विधेयक पहले भी कई बार पेश किया जा चुका है, लेकिन अब इसे संसद में लाने की तैयारी की जा रही है। यदि यह विधेयक पारित होता है, तो यह नेपाल में संघीय सिविल सेवा ढांचे को नई दिशा दे सकता है।
 

संघीय सिविल सेवा में सुधार

नई दिल्ली- नेपाल सरकार ने अपने प्रशासनिक ढांचे में महत्वपूर्ण परिवर्तन लाने के लिए एक नया संघीय सिविल सेवा विधेयक तैयार किया है। इस प्रस्तावित कानून का मुख्य उद्देश्य सरकारी तंत्र को अधिक पेशेवर, पारदर्शी और योग्यता-आधारित बनाना है, ताकि संघीय प्रणाली को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।


सेवानिवृत्ति की उम्र में वृद्धि

रिटायरमेंट उम्र 60 साल करने का प्रस्ताव
इस मसौदे में सिविल सेवा में सेवानिवृत्ति की उम्र को 58 वर्ष से बढ़ाकर 60 वर्ष करने का सुझाव दिया गया है। भर्ती प्रक्रिया में भी कई महत्वपूर्ण बदलाव किए जाने की योजना है। Public Service Commission Nepal के माध्यम से होने वाली भर्तियों में पुरुषों के लिए अधिकतम आयु सीमा 35 से घटाकर 32 वर्ष और महिलाओं के लिए 40 से घटाकर 35 वर्ष करने का प्रावधान है। सरकार का मानना है कि इससे युवा और ऊर्जावान उम्मीदवारों को अधिक अवसर मिलेंगे।


नई संरचना और प्रदर्शन आधारित प्रणाली

प्रदर्शन आधारित सिस्टम और नई संरचना
इस विधेयक में प्रांत स्तर पर अलग-अलग सिविल सेवाएं स्थापित करने, कर्मचारियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने और वरिष्ठ पदों पर मेरिट के आधार पर नियुक्ति की व्यवस्था शामिल है। इसके साथ ही ट्रेड यूनियनों को समाप्त करने का प्रस्ताव भी है, जिसके स्थान पर कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए वैकल्पिक तंत्र विकसित किए जाएंगे।


कर्मचारियों के ट्रांसफर नियम

ट्रांसफर नियम सख्त, राजनीति पर पूरी रोक
प्रस्तावित कानून के तहत सरकारी कर्मचारियों की राजनीतिक गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाएगा। दूरदराज या स्थानीय स्तर पर नियुक्ति से इनकार करने वाले कर्मचारियों को प्रमोशन नहीं दिया जाएगा। ट्रांसफर प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाया जाएगा और नई पोस्टिंग पर जॉइन करना सात दिनों के भीतर अनिवार्य होगा। इसके अलावा, किसी भी कर्मचारी को एक ही पद और कार्यालय में चार साल से अधिक रहने की अनुमति नहीं होगी।


आरक्षण और प्रमोशन में बदलाव

आरक्षण और प्रमोशन नियमों में बदलाव
इस विधेयक में आरक्षण का लाभ सीमित करते हुए यह तय किया गया है कि कोई भी कर्मचारी नॉन-गजेटेड और गजेटेड स्तर पर केवल एक-एक बार ही आरक्षण का फायदा उठा सकेगा। इसकी निगरानी के लिए केंद्रीय रिकॉर्ड सिस्टम तैयार किया जाएगा।


पुनः प्रस्तावित विधेयक

चौथी बार आया प्रस्ताव
यह विधेयक Balendra Shah सरकार के एक्शन प्लान के तहत तैयार किया गया है। इससे पहले 2017, 2022 और 2024-25 में भी ऐसे प्रयास किए गए थे, लेकिन विभिन्न कारणों से बिल पास नहीं हो पाया। हाल ही में प्रांतीय मुख्यमंत्रियों ने भी संघीय सिविल सेवा कानून जल्द लाने की मांग की थी।


सरकार की प्रतिक्रिया

सरकार का क्या कहना है?
मंत्री Pratibha Rawal के अनुसार, यह प्रस्ताव पूरी तरह मेरिट और प्रदर्शन आधारित सिविल सेवा प्रणाली स्थापित करने पर केंद्रित है। उनका कहना है कि इससे संघीय शासन व्यवस्था मजबूत होगी और केंद्र, प्रांत व स्थानीय स्तर के बीच बेहतर तालमेल बनेगा।


विधेयक की संभावित मंजूरी

अब सरकार इस मसौदे को कैबिनेट में पेश करने के बाद संसद में लाने की तैयारी कर रही है। यदि यह विधेयक पारित हो जाता है, तो नेपाल में लंबे समय से लंबित संघीय सिविल सेवा ढांचे को नई दिशा मिल सकती है।