न्यायमूर्ति संजय करोल के सम्मान में DRT बार एसोसिएशन का विदाई समारोह
समारोह का आयोजन
नई दिल्ली: डीआरटी बार एसोसिएशन, दिल्ली ने सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति संजय करोल के सम्मान में एक अभिनंदन एवं विदाई समारोह का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का नेतृत्व डीआरटी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विवेक सिंह ने किया। इस अवसर पर न्यायमूर्ति करोल के न्यायिक योगदान और उनके आदर्शों को याद करते हुए ‘न्यायाधीश के गुणों पर चिंतन’ विषय पर विशेष संबोधन दिया गया।
न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर विचार
विवेक सिंह ने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और ईमानदारी न्याय व्यवस्था में जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने यह भी बताया कि न्यायाधीश को संविधान, कानून और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निर्णय लेना चाहिए, बिना किसी दबाव या पूर्वाग्रह के।
न्यायाधीश के गुण
उन्होंने न्यायाधीश के लिए विनम्रता, धैर्य और संवेदनशीलता को महत्वपूर्ण गुण बताया, ताकि सभी पक्षकारों को निष्पक्ष सुनवाई का भरोसा मिल सके। विवेक सिंह ने यह भी कहा कि बदलते कानून और समाज के साथ निरंतर अध्ययन और सीखना आवश्यक है। किसी न्यायाधीश की विरासत उसके फैसलों से नहीं, बल्कि जनता में पैदा किए गए विश्वास और आने वाली पीढ़ियों के लिए छोड़े गए मूल्यों से तय होती है।
न्यायमूर्ति संजय करोल का न्यायिक सफर
न्यायमूर्ति संजय करोल का न्यायिक सफर
23 अगस्त 1961 को जन्मे न्यायमूर्ति संजय करोल ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से विधि की पढ़ाई की और दिल्ली सहित विभिन्न न्यायिक मंचों पर वकालत की। 1998 में उन्हें हिमाचल प्रदेश का महाधिवक्ता नियुक्त किया गया, जहां उन्होंने 2003 तक सेवाएं दीं। इसके बाद 8 मार्च 2007 को उन्हें हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नति मिली। इस पद पर वे करीब साढ़े 11 वर्ष तक रहे और एक वर्ष से अधिक समय तक कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में भी कार्य किया।
न्यायमूर्ति करोल की उपलब्धियां
14 नवंबर 2018 को उन्हें त्रिपुरा उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया। नवंबर 2019 में उनका स्थानांतरण पटना उच्च न्यायालय में हुआ, जहां उन्होंने तीन वर्ष से अधिक समय तक सेवाएं दीं। 6 फरवरी 2023 को उन्हें सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया। अपने कार्यकाल के दौरान, न्यायमूर्ति संजय करोल ने न्याय तक पहुंच, विधिक सहायता और न्यायिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के लिए पहचान बनाई। उनकी विनम्रता, ईमानदारी और जनसेवा के प्रति समर्पण ने उन्हें न्यायपालिका और विधिक समुदाय में सम्मान दिलाया।