पंजाब के मुख्यमंत्री ने शहीदों की विरासत को संजोने की आवश्यकता पर जोर दिया
शहीदों के बलिदान को याद करने का अवसर
चंडीगढ़/हुसैनीवाला में, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने देश के महान क्रांतिकारियों की अद्भुत विरासत को याद करते हुए कहा कि यह अवसर केवल उनके बलिदान को स्मरण करने का नहीं है, बल्कि उनके आदर्शों और अन्याय के खिलाफ खड़े होने के दृढ़ संकल्प को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का भी है।
उन्होंने शहीदों की महान सोच के अनुरूप पंजाब और देश की सेवा करने के अपने संकल्प को दोहराया और यह भी कहा कि इन महान स्वतंत्रता सेनानियों को अब तक भारत रत्न जैसे सर्वोच्च सम्मान से नवाजा नहीं गया है। मान ने यह भी कहा कि यदि आजादी के प्रारंभिक वर्षों में देश की बागडोर साहसी युवाओं के हाथ में होती, तो भारत की स्थिति कुछ और होती।
शहीदों को उचित सम्मान नहीं मिला
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस देश के स्वार्थी नेताओं ने अपने नाम पर स्टेडियम बनवाए, लेकिन सच्चे शहीदों जैसे भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को सम्मानित करने के लिए कोई आगे नहीं आया। उन्होंने कहा कि इन महान क्रांतिकारियों ने कम उम्र में अपनी जान दी, जबकि आजादी के बाद सत्ता के लालचियों ने कुर्सी पर कब्जा कर लिया और खून बहाकर मिली आजादी का श्रेय खुद ले लिया।
सत्ताधारी नेताओं की असंवेदनशीलता
मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीद राजगुरु, सुखदेव और भगत सिंह को याद करने के लिए केवल फूल चढ़ाए गए, जबकि अन्य लोग आजादी की विरासत का झूठा दावा कर प्रमुख बन गए। उन्होंने कहा कि इन महान योद्धाओं को चुप कराने के लिए उन्हें जल्दी फांसी दी गई थी, क्योंकि लोग उनके निडर विचारों के पीछे इकट्ठा होने लगे थे।
महंगी कीमत पर मिली आजादी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कोई भी यह नहीं सोच सकता कि हमारी आजादी कितनी महंगी थी—विभाजन के दौरान लगभग 10 लाख लोगों ने अपनी जान गंवाई और लाखों लोग विस्थापित हुए। उन्होंने कहा कि हमारे बुजुर्गों ने बहुत बलिदान दिए, लेकिन सत्ताधारी इस पीड़ा को समझने में असफल रहे हैं।
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