पंजाब में ईडी की कार्रवाई: बिल्डर अजय सहगल गिरफ्तार
अजय सहगल की गिरफ्तारी
चंडीगढ़: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इंडियन कोऑपरेटिव हाउसिंग बिल्डिंग सोसाइटी के सचिव अजय सहगल को जालंधर से गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी पंजाब सरकार से सनटेक सिटी परियोजना के लिए फर्जी सहमति पत्र प्रस्तुत करने के मामले में की गई है, जिसमें भूमि उपयोग परिवर्तन (सीएलयू) प्राप्त करने का आरोप है।
जांच की शुरुआत
ईडी ने पंजाब पुलिस द्वारा किसानों की शिकायतों के आधार पर इस मामले की जांच शुरू की। जांच में यह सामने आया कि अजय सहगल ने 15 भूमि मालिकों की 30.5 एकड़ भूमि के लिए फर्जी सहमति पत्र तैयार किए थे। इन दस्तावेजों के आधार पर, आरोपी संस्था और व्यक्तियों को 'सनटेक सिटी' नामक एक बड़े रियल एस्टेट प्रोजेक्ट के लिए सीएलयू प्रदान किया गया था।
तलाशी अभियान
ईडी ने 7 मई को इंडियन कोऑपरेटिव हाउसिंग बिल्डिंग सोसाइटी और एबीएस टाउनशिप प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े 8 परिसरों पर छापेमारी की। इस दौरान कारोबारी नितिन गोहेल की बालकनी से 21 लाख रुपये नकद फेंके गए, जिन्हें बाद में ईडी अधिकारियों ने बरामद कर लिया।
अन्य परियोजनाओं का विकास
जांच में यह भी पता चला कि अजय सहगल ने फर्जी सहमति पत्रों के आधार पर ला कैनेला आवासीय बहुमंजिला परिसर और डिस्ट्रिक्ट 7 वाणिज्यिक परिसर का विकास किया। इन परियोजनाओं की इकाइयां आरईआरए से पंजीकरण और अनुमोदन प्राप्त करने से पहले ही बेची जा रही थीं। आरोपियों ने इन अवैध परियोजनाओं से 200 करोड़ रुपये से अधिक की बिक्री की है।
भ्रष्टाचार की जांच
अजय सहगल ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए भूखंडों को ग्रेटर मोहाली क्षेत्र विकास प्राधिकरण (जीएमएडीए) के एस्टेट ऑफिसर को हस्तांतरित नहीं किया है। इसके अलावा, उच्च न्यायालय में हुई चर्चाओं के विपरीत, केवल 30 एकड़ भूमि के लिए आंशिक सीएलयू रद्द किया गया है।
आगे की कार्रवाई
ईडी अन्य वरिष्ठ अधिकारियों और सरकारी कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। ईडी इस मामले में और गिरफ्तारियों की प्रक्रिया में है और जीएमएडीए तथा अन्य सरकारी अधिकारियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, जिन्होंने अजय सहगल को इस धोखाधड़ी में मदद की।
अनियमितताओं का खुलासा
ईडी की जांच से जीएमएडीए और नगर एवं ग्रामीण नियोजन विभाग में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आई हैं। इन अनियमितताओं के तहत, सनटेक सिटी और अन्य डेवलपर्स को अवैध रिश्वत लेकर मंजूरी दी गई, जिससे पंजाब के रियल एस्टेट डेवलपर्स गरीब किसानों और भूस्वामियों की कीमत पर समृद्ध हुए।