पंजाब में केंद्र सरकार के भेदभाव पर कांग्रेस नेता की कड़ी प्रतिक्रिया
किसानों और पंजाब के अधिकारों की अनदेखी
किसानों को आज तक एमएसपी की कानूनी गारंटी नहीं मिली, बीबीएमबी से जुड़े फैसलों में भी पंजाब के हितों और अधिकारों की अनदेखी
जालंधर: कांग्रेस के नेता और पंजाब ब्राह्मण बोर्ड के पूर्व निदेशक रविश राज शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पंजाब दौरे पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में केंद्र की भाजपा सरकार ने पंजाब के साथ लगातार भेदभाव किया है। चाहे वह किसानों के मुद्दे हों, युवाओं के लिए रोजगार, बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट, उद्योगों को प्रोत्साहन, सीमावर्ती राज्य की सुरक्षा या नशे के खिलाफ प्रभावी रणनीति—हर मोर्चे पर पंजाब को उपेक्षित रखा गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर यह भेदभाव कब तक जारी रहेगा। 12 साल बीत जाने के बावजूद पंजाब को एक भी बड़ा केंद्रीय प्रोजेक्ट नहीं मिला है, जो उसके विकास और रोजगार के लिए महत्वपूर्ण साबित हो।
रविश राज ने कहा कि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी नहीं मिली है, जबकि भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) से जुड़े फैसलों में पंजाब के हितों और उसके नदी जल पर पारंपरिक अधिकारों की अनदेखी की गई है। उन्होंने कहा कि पंजाब जैसे सीमावर्ती राज्य, जो देश की खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, के साथ इस तरह का भेदभाव उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के दौरे से पंजाब को बड़े विकास पैकेज, नए उद्योग, रोजगार सृजन और लंबित वित्तीय मुद्दों के समाधान की उम्मीद थी, लेकिन राज्य को केवल औपचारिक घोषणाएं ही मिलीं। जीएसटी मुआवजा, ग्रामीण विकास फंड, अनाज खरीद का बकाया और कैश क्रेडिट लिमिट जैसे मुद्दे वर्षों से लंबित हैं। केवल रेलवे स्टेशनों का उद्घाटन, सड़कों का लोकार्पण या चुनावी भाषण पंजाब की समस्याओं का समाधान नहीं हैं। पंजाब ने हमेशा देश की खाद्य सुरक्षा, सीमाओं की रक्षा और राष्ट्रीय एकता में अग्रणी भूमिका निभाई है, इसलिए उसे उसका हक मिलना चाहिए, न कि उपेक्षा।
रविश राज ने कहा कि पंजाब की जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि समान व्यवहार, ठोस विकास योजनाएं और राज्य के हितों की रक्षा करने वाले फैसले चाहती है। अब समय आ गया है कि केंद्र सरकार पंजाब के साथ हो रहे इस भेदभाव को समाप्त करे और अपने इरादे और नीयत को स्पष्ट करे।