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पंजाब में गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने में सरकारें असफल: आरटीई एक्ट 2009 एक्शन कमेटी

चंडीगढ़ में आयोजित एक प्रेस वार्ता में आरटीई एक्ट 2009 एक्शन कमेटी ने पंजाब सरकार की आलोचना की है, जो गरीब बच्चों को निजी स्कूलों में मुफ्त शिक्षा देने में असफल रही है। संयोजक ओंकार नाथ और चेयरमैन जगमोहन सिंह राजू ने बताया कि उच्च न्यायालय के आदेशों के बावजूद सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ही कार्रवाई नहीं की, तो वे कानूनी उपायों का सहारा लेंगे। यह मुद्दा न केवल कानून का है, बल्कि हजारों बच्चों के भविष्य से भी जुड़ा है।
 

चंडीगढ़ में प्रेस वार्ता


चंडीगढ़ समाचार: आरटीई एक्ट 2009 के तहत गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने की जिम्मेदारी सभी राज्य सरकारों पर है, लेकिन पंजाब में 2010 के बाद से किसी भी सरकार ने इस कानून का सही तरीके से पालन नहीं किया है। यह जानकारी आरटीई एक्ट 2009 एक्शन कमेटी के संयोजक ओंकार नाथ और के.एस. राजू लीगल ट्रस्ट के चेयरमैन जगमोहन सिंह राजू ने चंडीगढ़ प्रेस क्लब में आयोजित एक प्रेस वार्ता में दी। ओंकार नाथ ने बताया कि पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने 19 फरवरी 2025 को इस कानून को लागू करने के लिए आदेश जारी किए थे, लेकिन पंजाब सरकार अब तक इन आदेशों का पालन करने में असफल रही है।



उन्होंने चिंता व्यक्त की कि हाईकोर्ट के आदेश को पांच महीने से अधिक हो चुके हैं, लेकिन निजी स्कूल और शिक्षा विभाग अब तक अनुपालन नहीं कर रहे हैं, जिससे हजारों बच्चे निःशुल्क प्राथमिक शिक्षा के अपने अधिकार से वंचित रह गए हैं।


जगमोहन सिंह राजू ने कहा कि आरटीई एक्ट 2010 से लागू है, लेकिन अकाली दल-भाजपा, कांग्रेस और आप की सरकारों ने 12(1)(सी) के तहत 25 प्रतिशत बच्चों को निःशुल्क प्रवेश देने में विफलता दिखाई है। इससे 10 लाख से अधिक बच्चे शिक्षा से वंचित रह गए हैं। उन्होंने कहा कि न्यायालय के आदेशों की अवहेलना की गई है और सीडब्ल्यूपी-पीआईएल -185-2024 और सीडब्ल्यूपी-पीआईएल-14-2024 में कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं हुआ। शिक्षा विभाग ने पात्रता और दस्तावेज़ीकरण पर एसओपी जारी करने का वादा किया था, लेकिन यह अब तक नहीं किया गया।


ओंकार नाथ और जगमोहन सिंह राजू ने आरोप लगाया कि निजी स्कूल बिना स्पष्ट दिशा-निर्देशों के गरीब बच्चों के आवेदन अस्वीकार कर रहे हैं, जबकि वे आरटीई और कोर्ट के आदेशों के तहत बाध्य हैं। उन्होंने कहा कि यह न केवल संविधान के अनुच्छेद 21-ए का उल्लंघन है, बल्कि अदालत की अवमानना भी है।


उन्होंने मांग की कि शिक्षा विभाग अगले 7 दिनों में एसओपी और दिशानिर्देश जारी करे, और डीईओ और डीसी स्तर पर पात्र ईडब्ल्यूएस और डीजी बच्चों के प्रवेश को सख्ती से लागू किया जाए। आदेश न मानने वाले निजी स्कूलों पर कानूनी कार्रवाई की जाए। यदि सरकार ने तत्काल कदम नहीं उठाए, तो आरटीई एक्ट 2009 एक्शन कमेटी और के.एस. राजू लीगल ट्रस्ट हाईकोर्ट में अवमानना याचिकाएं दाखिल करेंगे।


ओंकार नाथ और जगमोहन सिंह राजू ने कहा कि यह केवल कानून की बात नहीं है, बल्कि हजारों बच्चों के भविष्य की बात है। पंजाब सरकार संविधानिक कर्तव्यों और न्यायिक आदेशों को ठुकरा रही है।