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पंजाब में जल संसाधन परियोजनाओं से किसानों को मिलेगा नहरी पानी

पंजाब के जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने किसानों के लिए जल संसाधन परियोजनाओं का उद्घाटन किया है। इन योजनाओं के तहत नहरी पानी को खेतों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे किसानों की सिंचाई लागत में कमी आएगी और भूजल संरक्षण होगा। जानें इस परियोजना के तहत किए गए निवेश और लाभ के बारे में।
 

जल संसाधन मंत्री गोयल की घोषणा


बरिंदर कुमार गोयल ने 26.12 करोड़ रुपए की जल संसाधन परियोजनाओं का उद्घाटन किया, जिससे नहरों का पुनरुद्धार, भूमिगत पाइपलाइन और लिफ्ट सिंचाई योजनाओं के माध्यम से हजारों एकड़ भूमि को नहरी पानी मिलेगा।


श्री चमकौर साहिब: पंजाब के जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने कहा कि राज्य के हिस्से का पानी किसानों के खेतों तक पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि नहरी नेटवर्क को मजबूत करने से न केवल किसानों की सिंचाई लागत में कमी आएगी, बल्कि भूजल संरक्षण भी सुनिश्चित होगा।


गोयल ने कहा कि सरकार इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रही है और जल्द ही नहरी पानी राज्य के हर कोने तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने बताया कि 2022 में जहां 26 प्रतिशत नहरी पानी का उपयोग हो रहा था, अब यह बढ़कर 88 प्रतिशत हो गया है।


श्री चमकौर साहिब में निवेश

गोयल ने बताया कि श्री चमकौर साहिब विधानसभा क्षेत्र में समराला मेजर को पक्का करने, अमराला माइनर के पुनरुद्धार और भूमिगत पाइपलाइन बिछाने पर कुल 26.12 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। इन परियोजनाओं से हजारों एकड़ भूमि को नहरी सिंचाई का लाभ मिलेगा।


उन्होंने कहा कि समराला मेजर को 7.21 किलोमीटर लंबाई तक पक्का करने में 11.74 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं, जिससे 13 गांवों को लाभ होगा और नहरी सिंचाई का क्षेत्रफल 2,516 एकड़ से बढ़कर 3,333 एकड़ हो जाएगा। इससे 817 एकड़ अतिरिक्त भूमि को नहरी पानी मिलेगा।


अमराला माइनर का पुनरुद्धार

अमराला माइनर को 3.35 किलोमीटर लंबाई तक पक्का करने का कार्य 2.01 करोड़ रुपए की लागत से पूरा किया गया है। इससे 4 गांवों को लाभ मिलेगा और नहरी सिंचाई का क्षेत्र 1,519 एकड़ से बढ़कर 2,223 एकड़ हो जाएगा। इस प्रकार 704 एकड़ अतिरिक्त भूमि नहरी सिंचाई के दायरे में आ जाएगी।


भूमिगत पाइपलाइन का कार्य

किसानों के खेतों तक नहरी पानी पहुंचाने के लिए 10.76 किलोमीटर लंबी दो भूमिगत पाइपलाइनें बिछाई गई हैं, जिन पर 8.95 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। इससे 9 गांवों को लाभ मिलेगा और नहरी सिंचाई का क्षेत्र 1,698 एकड़ से बढ़कर 2,295 एकड़ हो जाएगा। इस प्रकार 597 एकड़ अतिरिक्त भूमि को नहरी पानी मिलना सुनिश्चित हुआ है।