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पंजाब में नशे के खिलाफ विरोध पर हिंसा, बिक्रमजीत सिंह की हत्या

पंजाब में नशे के कारोबार के खिलाफ उठे विरोध के चलते एक गंभीर घटना में बिक्रमजीत सिंह की हत्या कर दी गई। यह घटना उस समय हुई जब राज्य में नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद तनाव बना हुआ था। इस घटना ने नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। जानें इस मामले में पुलिस की कार्रवाई और स्थानीय लोगों की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों के बारे में।
 

पंजाब में नशे के खिलाफ हिंसा की नई घटना


पंजाब में नशे के खिलाफ हिंसा: पंजाब में नशे के कारोबार के खिलाफ उठे विरोध के चलते एक और गंभीर घटना सामने आई है। गुरदासपुर जिले के श्री हरगोबिंदपुर क्षेत्र के माड़ी पन्नवां गांव में नशीले पदार्थों की बिक्री का विरोध करने पर तीन व्यक्तियों पर धारदार हथियारों से हमला किया गया। इस हमले में 40 वर्षीय बिक्रमजीत सिंह की जान चली गई, जबकि उनके दो साथी गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस घटना ने क्षेत्र में तनाव और शोक का माहौल पैदा कर दिया है। इसके साथ ही, पंजाब की राजनीति में भी हलचल मच गई है।


परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद की घटना

यह घटना उस समय हुई है जब पंजाब के मानसा जिले में नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या को लेकर पहले से ही तनाव बना हुआ है। 13 अक्टूबर को झोटा की एक मेडिकल स्टोर संचालक के साथ नशीली दवाओं की बिक्री को लेकर बहस हुई थी, जिसके दौरान उन्हें गोली मार दी गई। इस घटना के समय वह फेसबुक लाइव कर रहे थे। पुलिस ने इस मामले में आरोपी मेडिकल स्टोर संचालक अश्वनी कुमार को गिरफ्तार कर लिया है।


नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों की सुरक्षा पर चिंता

मानसा में झोटा की हत्या और अब बिक्रमजीत सिंह की मौत की घटना ने पंजाब में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। झोटा की हत्या के विरोध में 15 अक्टूबर को पंजाब के कई हिस्सों में बंद का आयोजन किया गया था। इस बीच, माड़ी पन्नवां गांव की घटना ने नशे के कारोबार और उससे जुड़े विवादों पर बहस को और तेज कर दिया है। फिलहाल, बिक्रमजीत सिंह की मौत के मामले में पुलिस जांच जारी है और घायलों की स्थिति पर आगे की जानकारी का इंतजार किया जा रहा है। यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि नशे की अवैध बिक्री के खिलाफ शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई और स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।