पंजाब में नहर सिंचाई प्रणाली का पुनरुद्धार: 2026 तक 78% क्षेत्र सिंचित
नहर सिंचाई प्रणाली का ऐतिहासिक निवेश
पंजाब सरकार ने ग्रामीण इलाकों में नहर सिंचाई प्रणाली को मजबूत करने के लिए 6,700 करोड़ रुपए का ऐतिहासिक निवेश किया है। इस प्रयास के तहत, नहरों से सिंचित क्षेत्र 2022 में 26 प्रतिशत से बढ़कर 2026 में 78 प्रतिशत हो गया है। यह पिछले 40-50 वर्षों में पहली बार है जब 1,365 गांवों तक नहर का पानी पहुंचा है।
इस परियोजना के अंतर्गत 15,539 किलोमीटर नहरों की सफाई और 18,349 जलमार्गों का पुनरुद्धार किया गया है। कंडी नहर परियोजना, जिसमें 239 करोड़ रुपए का निवेश किया गया है, 433 गांवों और 1.25 लाख एकड़ भूमि को पानी उपलब्ध कराएगी। महोराणा डिस्ट्रीब्यूटरी के पुनर्निर्माण और 288 करोड़ रुपए की मालेरकोटला माइनर परियोजना से 55 गांवों की 44,000 एकड़ भूमि की सिंचाई होगी।
बंद पड़ी नहरों का पुनर्जीवित होना
पंजाब के इतिहास में पहली बार, 545 किलोमीटर तक फैली 101 बंद पड़ी नहरों को पुनर्जीवित किया गया है। इनमें से कई नहरें 30 से 40 वर्षों से बंद थीं और मिट्टी से भरी हुई थीं। पंजाब सरकार ने बिना किसी जमीन पर कब्जा किए इन नहरों को बहाल किया है।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने तरनतारन जिले का उदाहरण देते हुए बताया कि पिछली सरकारों की लापरवाही के कारण 22 किलोमीटर लंबी सरहाली माइनर नहर पूरी तरह से लुप्त हो गई थी। जब इंजीनियरों ने काम शुरू किया, तो उन्होंने नहर को जमींदोज पाया। स्थानीय लोग भी इसकी अस्तित्व को भूल चुके थे। अब इसे पुनर्जीवित कर दिया गया है।
नहरों की क्षमता में वृद्धि
फिरोजपुर फीडर नहर, जो 1952 में बनाई गई थी, को रिकॉर्ड 35 दिनों में अपग्रेड किया गया है, जिससे इसकी क्षमता में 2,682 क्यूसेक की वृद्धि हुई है। इसी तरह, सरहिंद नहर, जो मालवा की जीवन रेखा मानी जाती है और जिसे 1950 के आसपास बनाया गया था, को 75 साल बाद अपग्रेड किया गया है, जिससे इसकी क्षमता में 2,844 क्यूसेक की वृद्धि हुई है।