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पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में वृद्धि, प्रशासन की कार्रवाई जारी

पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं, जिसमें 404 मामले दर्ज किए गए हैं। प्रशासन ने इस पर कड़ी कार्रवाई करते हुए पर्यावरणीय मुआवजे की वसूली की है। अमृतसर और तरनतारन में सबसे अधिक घटनाएं सामने आई हैं। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने 'फ्लाइंग स्क्वॉड' की तैनाती की है, जो 30 नवंबर तक निगरानी रखेगी। जानें इस मुद्दे पर और क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
 

पराली जलाने की घटनाओं पर प्रशासन की नजर

पटियाला: पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासनिक उपायों का सिलसिला जारी है। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) द्वारा 20 अक्टूबर तक की गई रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्य में कुल 404 पराली जलाने की घटनाएं दर्ज की गई हैं। इनमें से 358 खेतों का निरीक्षण किया जा चुका है, और 151 स्थानों पर पराली जलाने की पुष्टि हुई है।


अमृतसर और तरनतारन में सबसे अधिक घटनाएं

रिपोर्ट के अनुसार, अमृतसर में 117 और तरनतारन में 198 आग की घटनाएं सामने आई हैं। तरनतारन में 176 खेतों का निरीक्षण किया गया, जिसमें 75 स्थानों पर पराली जलाने की पुष्टि हुई। अमृतसर में 111 खेतों का निरीक्षण हुआ और 42 मामलों में पराली जलाने की पुष्टि की गई।


अन्य जिलों में घटनाओं का विवरण

गुरदासपुर में 23, फिरोजपुर में 14 और कपूरथला में 16 आग की घटनाएं दर्ज की गई हैं। जालंधर में 5 और पटियाला में 4 घटनाएं सामने आई हैं। पटियाला में 3 खेतों का निरीक्षण किया गया और 2 स्थानों पर पराली जलाने की पुष्टि हुई। यहां पर 10,000 रुपए का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया है।


पर्यावरणीय मुआवजे की वसूली

राज्यभर में पराली जलाने से संबंधित मामलों में अब तक 7.20 लाख रुपए का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया है, जिसमें से 3.40 लाख रुपए की वसूली की जा चुकी है। रिपोर्ट के अनुसार, 39 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई हैं, जबकि 106 मामलों में राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री की गई है। इसके अलावा, संबंधित अधिकारियों द्वारा 152 चेतावनी नोटिस जारी किए गए हैं।


फ्लाइंग स्क्वॉड की तैनाती

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने धान की पराली जलाने की घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए पंजाब में 'फ्लाइंग स्क्वॉड' की तैनाती की है। ये टीमें 30 नवंबर तक फील्ड स्तर पर निगरानी रखेंगी। यह तैनाती विभिन्न चरणों में की गई है, ताकि धान की कटाई के मौसम के दौरान लगातार निगरानी बनी रहे। इसमें प्रमुख धान उत्पादक जिलों जैसे संगरूर, तरनतारन, फिरोजपुर, मुक्तसर, बठिंडा, अमृतसर, मोगा, मनसा, फाजिल्का, पटियाला, लुधियाना, कपूरथला, फरीदकोट, बरनाला, मालेरकोटला, गुरदासपुर, जालंधर और फतेहगढ़ साहिब शामिल हैं।