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पंजाब विधानसभा में विश्वास मत: भगवंत मान सरकार ने 88 वोटों से जीती

पंजाब विधानसभा में भगवंत मान की सरकार ने शुक्रवार को विश्वास मत हासिल किया, जिसमें 88 वोट मिले। इस विशेष सत्र में विपक्ष के विधायक अनुपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति से मांग की है कि आम आदमी पार्टी के सांसदों की सदस्यता रद्द की जाए। सदन में हंगामे के बीच, नेता प्रतिपक्ष ने विधायकों का डोप टेस्ट कराने की मांग की, जिसे स्पीकर ने ठुकरा दिया। जानें इस घटनाक्रम के पीछे की पूरी कहानी और राजनीतिक स्थिति।
 

विशेष सत्र में विश्वास मत हासिल

चंडीगढ़। पंजाब में भगवंत मान की सरकार को कोई खतरा नहीं था, फिर भी शुक्रवार को विधानसभा का एक विशेष सत्र बुलाकर सरकार ने विश्वास मत प्राप्त किया। इस प्रक्रिया में सरकार के पक्ष में 88 वोट पड़े। उल्लेखनीय है कि आम आदमी पार्टी के पास पंजाब की 117 सदस्यीय विधानसभा में 94 विधायक हैं। विश्वास मत पर चर्चा के दौरान छह विधायक अनुपस्थित रहे, जिनमें से दो जेल में हैं और चार अन्य कारणों से नहीं आए।


विपक्ष की अनुपस्थिति और राष्ट्रपति को ज्ञापन

सदन में मतदान के समय कांग्रेस, भाजपा और अकाली दल के विधायक उपस्थित नहीं थे। इससे पहले, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि वे विधानसभा की कार्यवाही की कॉपी राष्ट्रपति को सौंपेंगे। उल्लेखनीय है कि आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों ने पार्टी छोड़कर भाजपा जॉइन कर लिया है, जिनमें से छह सांसद पंजाब के हैं। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति से इन सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग की है।


सदन में हंगामा और विवाद

हालांकि, विधानसभा की कार्यवाही के दौरान उस समय हंगामा हुआ जब नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने स्पीकर को पत्र देकर मुख्यमंत्री और सभी विधायकों का डोप टेस्ट कराने की मांग की। स्पीकर ने इस मांग को अस्वीकार कर दिया। कार्यवाही के दौरान, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कांग्रेस विधायकों पर टिप्पणी की कि वे सदन में मोबाइल का उपयोग कर रहे हैं। इसके बाद, कांग्रेस विधायक सुखपाल खैहरा के बैठने के तरीके पर भी विवाद उत्पन्न हुआ। खैहरा ने मुख्यमंत्री पर आपत्तिजनक टिप्पणी की, जिसके बाद हंगामा बढ़ गया और कांग्रेस विधायक सदन से बाहर चले गए।