पंजाब सरकार का नशा तस्करों के खिलाफ सख्त अभियान
पंजाब में नशे के खिलाफ सख्त कार्रवाई
चंडीगढ़: पंजाब सरकार नशे के खिलाफ एक ठोस रणनीति के तहत कार्रवाई कर रही है। यह न केवल सीमा पार से आने वाले नशों को रोकने के लिए कदम उठा रही है, बल्कि राज्य में नशा तस्करों के खिलाफ भी सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। नशा एक वैश्विक समस्या है, लेकिन पंजाब में इसे समाप्त करने के लिए जो प्रयास किए जा रहे हैं, वे अद्वितीय हैं।
सरकार ने नशे की समस्या से निपटने के लिए एक नया अभियान शुरू किया है, जिसमें मादक पदार्थों के सौदागरों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। कई स्थानों पर उनकी संपत्तियों को ध्वस्त किया गया है। पंजाब सरकार ने नशा तस्करों के खिलाफ सख्त कदम उठाने के लिए एक दो साल का रोडमैप तैयार किया है, जिसमें नशे के दलदल में फंसे युवाओं को पुनर्वास पर भी ध्यान दिया गया है।
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य पंजाब में नशे को जड़ से खत्म करना है। मुख्यमंत्री स. भगवंत सिंह मान ने स्पष्ट किया है कि राज्य नशे के खिलाफ निर्णायक जीत की ओर बढ़ रहा है। पिछले साढ़े तीन वर्षों में 85,418 नशा तस्करों को गिरफ्तार किया गया है, और एन.डी.पी.एस. अधिनियम के तहत सजा दर 88 प्रतिशत रही है।
मान सरकार के कार्यकाल में 63,053 मामले नशा तस्करों के खिलाफ दर्ज किए गए हैं। नशे से निपटने के लिए प्रवर्तन, नशा मुक्ति और रोकथाम पर आधारित एक बहु-आयामी रणनीति तैयार की गई है, जिसके परिणाम उत्साहजनक रहे हैं। इस अभियान के तहत नशा आपूर्ति करने वालों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई है।
पंजाब में साढ़े तीन वर्षों में 5,119.94 किलोग्राम हेरोइन, 3,458.53 किलोग्राम अफीम, 5.82 किलोग्राम कोकीन, 82.04 किलोग्राम आइस, 4.98 करोड़ कैप्सूल और 52.46 करोड़ रुपये की ड्रग मनी बरामद की गई है। नशे के खिलाफ यह लड़ाई अब एक जन-आंदोलन बन चुकी है। इसके लिए विलेज डिफेंस कमेटी का गठन किया गया है, जिसमें करीब डेढ़ लाख वालंटियर्स शामिल हैं।
सरकार ने एक विशेष मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया है, जिसके माध्यम से वालंटियर्स नशे से संबंधित जानकारी सीधे सरकार तक पहुंचा सकते हैं। इसके अलावा, नशा तस्करों द्वारा बनाई गई संपत्तियों पर समय-समय पर बुल्डोजर चलाए जाते हैं। नशा मुक्ति केंद्रों में भी सुधार किया गया है, जहां अब मरीजों को बेहतर सुविधाएं दी जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने इन केंद्रों को हाई-टेक बनाया है, जहां एसी, सीसीटीवी और अच्छे खाने का इंतजाम है। मरीजों के लिए बेड की संख्या 1500 से बढ़ाकर 5000 कर दी गई है, और सभी सेवाएं मुफ्त प्रदान की जा रही हैं।