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पंजाब सरकार की नई योजनाओं से किसानों की खुशहाली में वृद्धि

पंजाब सरकार ने किसानों के कल्याण के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिसमें गन्ने की कीमत में रिकॉर्ड वृद्धि और बाढ़ प्रभावित किसानों के लिए मुआवजे की घोषणा शामिल है। यह कदम न केवल किसानों की मेहनत का सम्मान करता है, बल्कि कृषि क्षेत्र में स्थिरता और विकास को भी सुनिश्चित करता है। जानें कैसे ये योजनाएं पंजाब के किसानों को सशक्त बना रही हैं और प्रदेश की खुशहाली में योगदान कर रही हैं।
 

गन्ने की कीमतों में ऐतिहासिक वृद्धि

देश में गन्ने का भाव 416 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंचा


चंडीगढ़: पंजाब एक कृषि प्रधान राज्य है, और यहां के किसानों की खुशहाली से ही प्रदेश की समृद्धि संभव है। पंजाब सरकार ने इस सिद्धांत को साकार किया है। सरकार ने हमेशा किसानों के हित में काम किया है और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से उनके कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया है। हाल ही में बाढ़ के कारण फसलों को हुए नुकसान के बाद, सरकार ने प्रभावित किसानों के लिए मुआवजे की घोषणा की। यह कदम दर्शाता है कि सरकार की नीतियां और कार्य किसानों के हित में हैं।


गन्ने की फसल के लिए रिकॉर्ड मूल्य वृद्धि, फसली विविधता अभियान और टिकाऊ कृषि प्रथाओं के प्रति प्रतिबद्धता ने पंजाब में कृषि खुशहाली के लिए एक नया मील का पत्थर स्थापित किया है। सरकार का उद्देश्य न केवल किसानों को सशक्त बनाना है, बल्कि पर्यावरणीय स्थिरता को भी सुनिश्चित करना है। गन्ने की कीमत में की गई वृद्धि किसानों की मेहनत के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।


पंजाब सरकार ने गन्ने के लिए देश में सबसे अधिक 416 रुपये प्रति क्विंटल की स्टेट एग्रीड प्राइस (एस.ए.पी.) की घोषणा की है। यह कदम सुनिश्चित करता है कि प्रदेश के गन्ना उत्पादकों को सर्वाधिक मूल्य मिले। इसके साथ ही, कपास के बीजों पर सब्सिडी और फसली विविधता जैसी योजनाएं भी महत्वपूर्ण बदलाव ला रही हैं।


मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के निर्देश पर, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को फिर से खेती योग्य बनाने का कार्य बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। इसके लिए 'जिसका खेत, उसकी रेत' नीति लागू की गई है। पिछले साल 11 सितंबर को विशेष गिरदावरी की घोषणा की गई थी, और 45 दिनों में मुआवजे का वितरण शुरू करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन सरकार ने 30वें दिन ही मुआवजे का वितरण शुरू कर दिया।


पंजाब में 2,508 गांवों में फसल का नुकसान हुआ है, जिससे लगभग 3.5 लाख एकड़ खेती योग्य जमीन प्रभावित हुई। सरकार ने बिना किसी देरी के किसानों को 20,000 रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देना शुरू किया, जो अब तक का सबसे बड़ा और तेज राहत अभियान है। यह सरकार ने किसानों को विश्वास दिलाया है कि जब बात पंजाब और पंजाबियत की आती है, तो यह केवल वादे नहीं करती, बल्कि उन्हें पूरा भी करती है।