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पंजाब सरकार की नई सड़क सुरक्षा फोर्स: क्या है SSF की सफलता की कहानी?

पंजाब सरकार ने सड़क सुरक्षा फोर्स (SSF) की स्थापना की है, जो न केवल सड़क दुर्घटनाओं को रोकने में मदद कर रही है, बल्कि लोगों की जानें भी बचा रही है। इस फोर्स में महिलाओं को भी महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है, और यह नशा तस्करी और आत्महत्या के मामलों में भी सक्रिय है। 2024 में, एसएसएफ के कार्यक्षेत्र में किसी भी बच्चे की सड़क दुर्घटना में मौत नहीं हुई, जो एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। जानें इस फोर्स की सफलता की कहानी और इसके प्रभाव के बारे में।
 

पंजाब में सड़क सुरक्षा का नया अध्याय

पंजाब सरकार ने एक अनोखी पहल की है, जो पहले कभी नहीं देखी गई। सड़क सुरक्षा फोर्स, जिसे एसएसएफ के नाम से जाना जाता है, अब राज्य के हर कोने में एक नई ताकत बनकर उभरी है। यह फोर्स न केवल सड़क दुर्घटनाओं को रोकने में मदद कर रही है, बल्कि लोगों की जानें भी बचा रही है, जिससे परिवारों को बिखरने से बचाया जा रहा है। यह हर पंजाबी को यह विश्वास दिला रही है कि सरकार हर कदम पर उनके साथ है।


SSF की शुरुआत कब हुई?

जनवरी 2024 में भगवंत मान सरकार द्वारा शुरू की गई इस फोर्स ने कुछ ही महीनों में बड़ा बदलाव लाने का काम किया है। पंजाब की 4100 किलोमीटर लंबी सड़कों पर हर 30 किलोमीटर पर एसएसएफ की टीमें तैनात हैं। ये टीमें, जो टोयोटा हिलक्स और महिंद्रा स्कॉर्पियो जैसे आधुनिक वाहनों से लैस हैं, दुर्घटना की सूचना मिलने पर 5 से 7 मिनट में घटनास्थल पर पहुंच जाती हैं। घायल व्यक्तियों को तुरंत प्राथमिक चिकित्सा देकर अस्पताल पहुंचाया जाता है। अब तक 35,000 से अधिक लोगों की जानें बचाई जा चुकी हैं।


महिलाओं की भूमिका में वृद्धि

मान सरकार ने इस फोर्स में महिलाओं को भी महत्वपूर्ण भूमिका दी है। वर्तमान में 28% महिलाएं एसएसएफ का हिस्सा हैं। यह केवल एक नौकरी नहीं है, बल्कि यह एक विश्वास की ड्यूटी है, जो दर्शाती है कि सरकार वास्तविक बदलाव ला रही है। यही असली सशक्तिकरण है।


अपराधों की रोकथाम में योगदान

एसएसएफ ने नशा तस्करी, चोरी की गाड़ियों और आत्महत्या के मामलों में भी महत्वपूर्ण कार्य किया है। अब तक आत्महत्या के प्रयास कर चुके 12 व्यक्तियों को समय पर बचाया गया है। रात के समय महिला यात्रियों, स्कूली बच्चों और पर्यटकों को सुरक्षित पहुंचाना इस फोर्स का नियमित कार्य बन गया है।


बच्चों की सुरक्षा में सफलता

2024 में एसएसएफ के कार्यक्षेत्र में स्कूल जाने वाले या लौटने वाले किसी भी बच्चे की सड़क दुर्घटना में मौत नहीं हुई। यह पहली बार है जब पंजाब में ऐसा हुआ है, जो दर्शाता है कि सरकार ने कागज पर नहीं, बल्कि वास्तविकता में काम किया है। यह फोर्स पूरी तरह से तकनीकी रूप से सक्षम है, जिसमें स्पीड गन, बॉडी कैमरा, ई-चालान सिस्टम, मोबाइल डेटा और एआई तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, ताकि पुलिसिंग को तेज, स्मार्ट और पारदर्शी बनाया जा सके।


अस्पताल खर्च और बीमा क्लेम में कमी

SSF के कारण अस्पतालों में खर्च में कमी आई है, बीमा क्लेम में गिरावट आई है और लोगों को मानसिक राहत मिली है। पर्यटन में वृद्धि हुई है, ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार आया है और लोगों का सरकार पर विश्वास और भी मजबूत हुआ है। एसएसएफ की सफलता एक योजना नहीं, बल्कि उस सोच की जीत है जो आम लोगों की जिंदगी को प्राथमिकता देती है।