पंजाब-हरियाणा के बीच सतलुज-यमुना लिंक नहर विवाद का समाधान निकट
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान नई जानकारी
पंजाब और हरियाणा के बीच पानी के विवाद को लेकर एक नई उम्मीद जगी है। सुप्रीम कोर्ट में आज हुई सुनवाई में बताया गया कि दोनों राज्य सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर विवाद को आपसी सहमति से सुलझाने की दिशा में सकारात्मक कदम उठा रहे हैं।
मुख्य न्यायाधीश ने इस प्रगति को देखते हुए सुनवाई को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। उन्होंने कहा कि जब मामला सही दिशा में बढ़ रहा है, तो सुनवाई की तारीख में बदलाव किया जा सकता है। अगली सुनवाई 20 अगस्त को होने की संभावना है।
सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल का बयान
इस विवाद पर चर्चा करते हुए सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने कहा कि यह एक मूल मुकदमा है जिसमें प्रगति हो रही है। उन्होंने कहा कि हरियाणा इस विवाद को सुलझाने के लिए सहमत है, जबकि पंजाब भी करीब आ रहा है।
अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने कहा कि आज हम एक ही सुर में बात कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब ने अपने दिल को खोल दिया है।
सतलुज-यमुना लिंक विवाद का इतिहास
सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर विवाद पंजाब और हरियाणा के बीच रावी-ब्यास नदियों के पानी के बंटवारे को लेकर एक पुराना कानूनी और राजनीतिक विवाद है। यह विवाद 214 किलोमीटर लंबी नहर के निर्माण से जुड़ा है, जिसका उद्देश्य हरियाणा को उसके हिस्से का पानी प्रदान करना है।
हरियाणा ने 1980 तक अपने हिस्से की नहर का निर्माण पूरा कर लिया था, जबकि पंजाब ने पानी देने का विरोध किया। 1981 में एक समझौता हुआ, लेकिन 1982 में काम शुरू होने के बाद भारी विरोध के कारण इसे रोकना पड़ा। यह मामला अब भी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।