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पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, अग्रिम जमानत पर रोक

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ा झटका लगा है, जब अदालत ने असम पुलिस द्वारा दर्ज मानहानि और जालसाजी के मामले में तेलंगाना हाईकोर्ट से मिली ट्रांजिट अग्रिम जमानत पर रोक लगा दी। इस मामले में असम के मुख्यमंत्री की पत्नी द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद यह विवाद शुरू हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में गंभीरता से सुनवाई की और पवन खेड़ा के लिए कानूनी विकल्प खुले रखे हैं। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और कोर्ट के आदेश के बारे में।
 

सुप्रीम कोर्ट का निर्णय

नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से एक महत्वपूर्ण कानूनी झटका मिला है। बुधवार को, शीर्ष अदालत ने असम पुलिस द्वारा दर्ज मानहानि और जालसाजी के मामले में तेलंगाना हाईकोर्ट से मिली ट्रांजिट अग्रिम जमानत पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी। इसके साथ ही, कोर्ट ने मामले में नोटिस जारी कर तीन हफ्ते के भीतर जवाब भी मांगा है।


मामले की पृष्ठभूमि

असम के मुख्यमंत्री की पत्नी द्वारा दर्ज केस


यह विवाद तब शुरू हुआ जब पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा की पत्नी रिनीकी भुइयां के पास विभिन्न देशों के कई पासपोर्ट और विदेशों में अघोषित संपत्तियां हैं। इन आरोपों के बाद, रिनीकी भुइयां ने असम पुलिस में खेड़ा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। असम पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए, पवन खेड़ा ने तेलंगाना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहां उन्हें 10 अप्रैल को एक हफ्ते की ट्रांजिट अग्रिम जमानत मिली थी। असम सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।


सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

आधार कार्ड से खुली पोल


सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान, असम सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कड़ी दलीलें पेश कीं। उन्होंने बताया कि खेड़ा ने तेलंगाना हाईकोर्ट में अधिकार क्षेत्र साबित करने के लिए अपनी पत्नी का आधार कार्ड पेश किया था। हालांकि, आधार कार्ड के पीछे उनका दिल्ली का पता दर्ज था, जिसे तुषार मेहता ने कानून का दुरुपयोग बताया।


सुप्रीम कोर्ट का आदेश

महत्वपूर्ण निर्णय


सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल की दलीलों को गंभीरता से लिया और हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र का अनुचित लाभ उठाने के प्रयास पर हैरानी जताई। अदालत ने तेलंगाना हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी, लेकिन पवन खेड़ा के लिए कानूनी रास्ता खुला रखा है। यदि वह असम की किसी उचित अदालत में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन करते हैं, तो सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश उस याचिका पर नकारात्मक प्रभाव नहीं डालेगा।