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पवनराजे निंबालकर हत्या मामले में सभी आरोपी बरी, 20 साल बाद आया फैसला

महाराष्ट्र के पवनराजे निंबालकर और उनके ड्राइवर समद काजी की हत्या के मामले में 20 साल बाद अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। सीबीआई की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में यह निर्णय सुनाया, जो उद्धव ठाकरे गुट के सांसद ओमराजे निंबालकर के लिए एक बड़ा झटका है। न्यायाधीश ने जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी की और गवाहों के बयानों पर सवाल उठाए। जानें इस मामले की पूरी कहानी और अदालत के फैसले के पीछे की वजहें।
 

मुंबई में पवनराजे निंबालकर हत्या केस का फैसला

मुंबई: महाराष्ट्र के चर्चित पवनराजे निंबालकर और उनके ड्राइवर समद काजी की हत्या के मामले में लगभग 20 साल बाद अदालत ने अपना निर्णय सुनाया है। सीबीआई की विशेष अदालत ने मुख्य आरोपी और एनसीपी के पूर्व सांसद पद्मसिंह पाटिल सहित सभी आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। यह निर्णय उद्धव ठाकरे गुट के सांसद ओमराजे निंबालकर के लिए एक बड़ा झटका है, जिनके पिता इस मामले में मारे गए थे। न्यायाधीश सत्यनारायण नावानंदार ने सुनवाई के दौरान जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली और जांच में हुई गंभीर खामियों पर कड़ी टिप्पणी की है।


गवाहों के बयानों पर उठे सवाल


निर्णय सुनाते हुए न्यायाधीश ने कहा कि यह एक अत्यंत दुखद घटना थी कि एक जननेता का इस तरह अंत हुआ। अदालत ने यह भी माना कि 2002 के बाद मृतक पवनराजे और मुख्य आरोपी पद्मसिंह पाटिल के बीच राजनीतिक मतभेद बढ़ गए थे। हालांकि, हत्या से संबंधित जो सबूत पेश किए गए, वे संदेह के घेरे में रहे। विशेष रूप से सरकारी गवाह पारसमल जैन के बयानों पर सवाल उठाए गए। गवाह ने दावा किया था कि उसने आईपीएस अधिकारी राकेश मारिया से मुलाकात की थी, लेकिन राकेश मारिया ने इस मुलाकात से साफ इनकार किया। न्यायाधीश ने कहा कि अभियोजन पक्ष को इस दिशा में गहन जांच करनी चाहिए थी, जो नहीं की गई।


जांच एजेंसियों की कार्यशैली पर सवाल


अदालत ने जांच एजेंसियों की कार्यशैली पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि एक न्यायाधीश को कानून के दायरे में रहकर न्याय देना होता है। इस मामले में जांच का स्तर बेहद कमजोर रहा। पुलिस और सीबीआई ने न तो आरोपियों के मोबाइल फोन जब्त किए और न ही उनके कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) मंगाए। गिरफ्तारी के समय आरोपियों के पास क्या सामान था, इसका भी कोई रिकॉर्ड नहीं रखा गया। अदालत ने कहा कि अगर मोबाइल नंबरों के आधार पर जांच की जाती, तो यह स्पष्ट हो सकता था कि कौन किसके संपर्क में था। इसके अलावा सरकारी गवाह के दावों पर भी अदालत ने अविश्वास जताया।


हत्या की घटना का विवरण


यह भयानक घटना 3 जून 2006 को हुई थी। पवनराजे निंबालकर और उनके ड्राइवर समद काजी मुंबई से उस्मानाबाद (अब धाराशिव) जा रहे थे, तभी नवी मुंबई के कलंबोली क्षेत्र में बदमाशों ने उनकी गाड़ी रोकी और दोनों की गोली मारकर हत्या कर दी। आरोप था कि पद्मसिंह पाटिल ने राजनीतिक और व्यावसायिक दुश्मनी के चलते 30 लाख रुपये की 'कॉन्ट्रैक्ट किलिंग' करवाई थी। इस मामले में पाटिल के अलावा अन्य कई आरोपियों को भी नामित किया गया था। 15 साल तक चले इस लंबे ट्रायल में कुल 128 गवाहों से पूछताछ की गई, लेकिन लचर जांच और पुख्ता सबूतों के अभाव में सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया।