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पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान तनाव: युद्धविराम के बावजूद जारी संघर्ष

पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है, जबकि दोनों देशों के बीच युद्धविराम के बावजूद हमले जारी हैं। ईरान ने कहा है कि जब तक उसके खिलाफ लगे प्रतिबंध नहीं हटाए जाते, स्थायी शांति संभव नहीं है। अमेरिका ने ईरानी संपत्तियों का उपयोग खाड़ी देशों के पुनर्निर्माण के लिए करने की योजना बनाई है। जानें इस जटिल स्थिति के बारे में अधिक जानकारी।
 

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव


अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष जारी


पश्चिम एशिया में तनाव की स्थिति में कोई सुधार नहीं हो रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम के बावजूद दोनों देश एक-दूसरे पर हमले कर रहे हैं। इसी बीच, इजराइल और हिज्बुल्लाह के बीच भी संघर्ष जारी है, जिसके कारण इजराइल ने लेबनान पर हमले तेज कर दिए हैं।


ईरान ने स्पष्ट किया है कि जब तक उसके खिलाफ लगे प्रतिबंध नहीं हटाए जाते और उसकी संपत्तियां वापस नहीं मिलतीं, तब तक स्थायी शांति संभव नहीं है। हाल ही में इजराइल के हमले में तीन लेबनानी सैनिकों की मौत हो गई। ईरान चाहता है कि इजराइल-हिज्बुल्लाह के बीच पूर्ण युद्धविराम हो, लेकिन इजराइल ने सैन्य कार्रवाई जारी रखने के संकेत दिए हैं।


अमेरिका-ईरान तनाव में नया मोड़

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब एक नए चरण में प्रवेश कर चुका है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग उन ईरानी संपत्तियों का उपयोग करने की योजना बना रहा है, जिन्हें प्रतिबंधों के तहत जब्त किया गया था। इन संपत्तियों का उपयोग खाड़ी देशों में युद्ध और हमलों से हुए नुकसान की भरपाई के लिए किया जाएगा।


रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन चाहता है कि ईरान अपने हमलों से हुए नुकसान की आर्थिक कीमत चुकाए। इस बीच, होर्मुज जलडमरूमध्य से लेकर लेबनान तक स्थिति लगातार तनावपूर्ण बनी हुई है।


अमेरिका की योजना

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की योजना है कि जब्त की गई ईरानी संपत्तियों का उपयोग खाड़ी देशों के पुनर्निर्माण में किया जाए। इसमें सऊदी अरब, कतर, बहरीन, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं, जो हाल के महीनों में ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमलों का सामना कर चुके हैं।


रिपोर्ट के अनुसार, ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे खाड़ी देशों से यह आकलन करें कि युद्ध में हुए नुकसान की मरम्मत के लिए कितनी राशि की आवश्यकता होगी। इसके बाद यह देखा जाएगा कि क्या जब्त की गई ईरानी संपत्तियों का कानूनी रूप से उपयोग किया जा सकता है।


ईरान की मांगें

ईरान लगातार यह मांग कर रहा है कि किसी भी समझौते से पहले उसके अरबों डॉलर के फंड को जारी किया जाए और प्रतिबंध हटाए जाएं। ईरान लगभग 24 अरब डॉलर की जमी हुई संपत्तियों को छुड़ाने की मांग कर रहा है।


अमेरिकी सेना ने हाल ही में ईरान के गोरोख और केश्म द्वीप स्थित रडार ठिकानों पर हमला किया। अमेरिकी सेना का कहना है कि यह कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों के लिए खतरा बने ईरानी ड्रोन को रोकने के लिए की गई। इसके जवाब में, ईरान ने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें दागी। कुवैत के अनुसार, सात बैलिस्टिक मिसाइलें आबादी वाले क्षेत्रों के ऊपर से गुजरीं, जिससे कुछ इमारतों को नुकसान हुआ, लेकिन किसी की जान नहीं गई।