पश्चिम एशिया में जल संकट: ईरान के हमलों का गंभीर प्रभाव
ईरान के हमलों से उत्पन्न नई चिंताएँ
ईरान के खाड़ी देशों पर लगातार हमलों ने नई चिंता को जन्म दिया है, जिससे 10 करोड़ लोगों के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष ने न केवल तेल की आपूर्ति को संकट में डाल दिया है, बल्कि जल संकट की संभावना को भी बढ़ा दिया है। खाड़ी देशों में पीने के पानी की उपलब्धता हमेशा से एक चुनौती रही है, और यहां समुद्र के पानी को शुद्ध करके पीने योग्य बनाया जाता है। इसके लिए बड़े पैमाने पर डीसैलीनेशन संयंत्र स्थापित किए गए हैं।
डीसैलीनेशन पर निर्भरता की महत्वपूर्णता
इस क्षेत्र में लगभग 10 करोड़ लोग डीसैलीनेटेड पानी पर निर्भर हैं। दुनिया के सबसे बड़े डीसैलीनेशन संयंत्र खाड़ी और लाल सागर के तटों पर स्थित हैं। विशेषज्ञ इसे डीसैलीनेशन डिपेंडेंसी कहते हैं। इन संयंत्रों को न तो आसानी से बदला जा सकता है और न ही बायपास किया जा सकता है। किसी बड़े संयंत्र को नुकसान पहुंचने पर उसकी मरम्मत में कई महीने लग सकते हैं, जिससे इनका संरक्षण आवश्यक हो जाता है।
आपात स्थिति की संभावना
ईरान में तेल डिपो पर हमलों और खाड़ी क्षेत्र में जल एवं ऊर्जा परिसरों के पास मिसाइल और ड्रोन हमलों ने इस बुनियादी ढांचे की असुरक्षा को उजागर किया है। लगभग 10 करोड़ लोगों की रोजमर्रा की जरूरतें इन संयंत्रों पर निर्भर हैं। डीसैलीनेशन संयंत्र अरब प्रायद्वीप के देशों जैसे दुबई, दोहा, कुवैत सिटी और अबू धाबी की जल आपूर्ति का मुख्य स्रोत हैं। सऊदी अरब में 70% पीने का पानी इन्हीं संयंत्रों से आता है, जबकि कुवैत और ओमान में यह आंकड़ा 90% तक पहुंच जाता है।