पश्चिम एशिया में नई राजनीतिक स्थिति का उदय: हिजबुल्ला का बयान
अमेरिका और इजरायल की विफलता पर हिजबुल्ला का आरोप
कहा, अमेरिका और इजरायल ईरान और क्षेत्र से प्रतिरोधी गुटों को खत्म करने में विफल रहे
West Asia Crisis (तेहरान): अमेरिका और ईरान के बीच स्थायी समझौते के पहले दौर की वार्ता के बाद तनाव बढ़ गया है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि वह ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं देंगे और लेबनान में अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखेंगे। इस बीच, हिजबुल्ला के प्रमुख शेख नईम कासिम ने अमेरिका और इजरायल पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
कासिम के अनुसार, अमेरिका और इजरायल ने क्षेत्र में प्रतिरोधी ताकतों को कमजोर करने का प्रयास किया, लेकिन वे इसमें असफल रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब क्षेत्र में नई राजनीतिक और सुरक्षा स्थितियाँ उभर रही हैं। पिछले तीन महीनों में ईरान और लेबनान पर हुए हमलों के संदर्भ में कासिम ने कहा कि अमेरिका-इजरायल की योजना पूरी तरह से विफल हो चुकी है।
इजरायल की कार्रवाई अमेरिका के समर्थन पर निर्भर
कासिम ने यह भी कहा कि लेबनान में इजरायल की सैन्य कार्रवाई अमेरिका के समर्थन के बिना संभव नहीं थी। उन्होंने बताया कि हालिया संघर्ष के बाद पश्चिम एशिया एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है, जिसमें अमेरिकी-इजरायली परियोजना को हार का सामना करना पड़ा है। शेख नईम कासिम ने मध्य अशूरा परिषद को संबोधित करते हुए कहा कि ईरान ने भारी नुकसान सहने के बावजूद अपनी स्थिति को मजबूत किया है।
उन्होंने यह भी कहा कि ईरान अपने अधिकारों और क्षेत्रीय प्रभाव को कभी नहीं छोड़ेगा।
युद्धविराम प्रस्तावों की आलोचना
हिजबुल्ला के प्रमुख ने उन युद्धविराम प्रस्तावों की आलोचना की, जिनमें इजरायल को सैन्य कार्रवाई जारी रखने की अनुमति दी जाती है। कासिम ने कहा कि ऐसे समझौते वास्तव में युद्धविराम नहीं हैं, बल्कि आक्रामकता को जारी रखने का एक साधन हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जब हिजबुल्ला ने अतीत में युद्धविराम का पालन किया, तब इजरायल ने समझौतों का उल्लंघन किया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन ऐसे किसी भी प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करेगा, जिसमें पूरी तरह से सैन्य कार्रवाई बंद करने की गारंटी न हो।