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पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव: अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष की नई लहर

पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष ने एक बार फिर युद्ध की स्थिति पैदा कर दी है। हाल ही में ईरान ने अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल हमले किए हैं, जबकि अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई की है। इस संघर्ष का वैश्विक सप्लाई चेन पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है, विशेषकर एशिया में पेट्रोलियम और एलपीजी की आपूर्ति में। जानें इस जटिल स्थिति के बारे में और अधिक जानकारी।
 

पश्चिम एशिया में युद्ध की स्थिति


दोनों पक्षों के बीच बढ़ती गोलाबारी


तेहरान से मिली जानकारी के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष एक बार फिर तेज हो गया है। पिछले तीन दिनों से अमेरिकी बल ईरान के विभिन्न शहरों को निशाना बना रहे हैं, जबकि ईरान भी उन देशों पर हमले कर रहा है जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने स्थित हैं। हालिया घटनाक्रम में, अमेरिका ने ईरान पर बड़े हमले की पुष्टि की है, और ईरान ने भी अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है।


ईरान का मिसाइल हमला

ईरान के इस्लामी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने जॉर्डन के प्रिंस हसन एयरबेस पर कई बैलिस्टिक मिसाइलों से हमले का दावा किया है। ईरानी सरकारी चैनल आईआरआईबी के अनुसार, आईआरजीसी की एयरोस्पेस फोर्स ने इस एयरबेस पर स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। आईआरजीसी ने बताया कि हमले में एयरबेस का कमान और नियंत्रण केंद्र तथा ड्रोन रखने वाले हैंगर को नष्ट कर दिया गया।


अमेरिका की प्रतिक्रिया

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने ईरान पर तीसरे दौर के सैन्य हमले शुरू करने के बाद कहा कि ईरान ने गलत निर्णय लिया है और अब उसे इसकी कीमत चुकानी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ईरान की क्षमताओं को कमजोर करके उसे भारी कीमत चुका रहा है, जिससे वह जलडमरूमध्य में स्वतंत्र रूप से गुजरने वाले नागरिक नाविकों और व्यावसायिक जहाजों पर हमले नहीं कर सके।


ईरान का मालवाहक जहाज पर हमला

ईरान के आईआरजीसी ने होर्मुज जलडमरूमध्य में साइप्रस के झंडे वाले एक मालवाहक जहाज पर हमला किया। अमेरिकी सेना के अनुसार, जहाज में आग लगने और इंजन क्षतिग्रस्त होने के कारण वह अपनी यात्रा जारी नहीं रख सका। इसके अलावा, जहाज के चालक दल का एक सदस्य लापता है। अमेरिकी सेना ने कहा कि ईरान को पहले हुए हमलों के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था, और उसे समझौते का पालन करने का एक और अवसर दिया गया था, लेकिन वह फिर से ऐसा करने में विफल रहा।


विश्व सप्लाई चेन पर प्रभाव

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की स्थिति में, जब ईरान ने मार्च में होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया था, तो इससे वैश्विक सप्लाई चेन में भारी बाधा आई थी। विशेष रूप से एशिया में पेट्रोलियम और एलपीजी की कमी हो गई थी। यदि संघर्ष लंबा खिंचता है, तो यह स्थिति फिर से उत्पन्न हो सकती है।