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पश्चिम एशिया में युद्ध की आहट: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव

पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने एक बार फिर युद्ध की संभावनाओं को जन्म दिया है। अमेरिका ने ईरान के कश्म द्वीप पर हमले के जवाब में मिसाइलों को नाकाम किया है, जबकि ईरान ने कुवैत और बहरीन पर हमले किए। जानें इस संकट की पूरी कहानी और इसके पीछे की वजहें।
 

अमेरिका का कश्म द्वीप पर हमला, ईरान का जवाबी मिसाइल हमला


वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की संभावनाएं एक बार फिर संकट में हैं, क्योंकि दोनों देशों ने एक-दूसरे पर सैन्य हमले शुरू कर दिए हैं। इस स्थिति ने पश्चिम एशिया में युद्ध की संभावनाओं को फिर से उजागर कर दिया है। अमेरिका ने यह भी दावा किया है कि उसकी सेना ने ईरान द्वारा क्षेत्र के पड़ोसी देशों पर किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों को विफल कर दिया है।


अमेरिका ने ईरान के कश्म द्वीप पर भी जवाबी कार्रवाई की है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि तेहरान ने क्षेत्र में हवाई हमलों की एक श्रृंखला शुरू की थी। सैन्य कमांड ने बताया कि ईरान ने अपने पड़ोसी देशों की ओर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, लेकिन सभी अपने लक्ष्यों को भेदने में असफल रहीं।


ईरान के हमलों को अमेरिका ने किया नाकाम

सेंटकॉम ने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ की गई रक्षात्मक कार्रवाइयों का विवरण साझा करते हुए बताया कि कुवैत पर दागी गई दो ईरानी मिसाइलें या तो लक्ष्य तक नहीं पहुंचीं या रास्ते में ही नष्ट हो गईं। वहीं, बहरीन पर दागी गई तीन मिसाइलों को अमेरिकी और बहरीन की वायु रक्षा बलों ने तुरंत रोक लिया। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि यह नाकेबंदी इसलिए की गई क्योंकि ईरान व्यापारिक जहाजों पर हमले कर रहा है।


उनका तर्क है कि यदि किसी अन्य देश के जहाज बाहर नहीं निकल पाएंगे, तो ईरान के जहाज भी नहीं निकल पाएंगे। यदि ईरान ने युद्धविराम लागू होने के समय जो वादा किया था, यानी होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने का, उसे मान लिया होता, तो यह नाकेबंदी नहीं होती। ईरान का यह व्यवहार गैर-कानूनी और अवैध है।