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पश्चिम एशिया संकट: उद्योगपतियों की चिंताएँ बढ़ी

पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने उद्योग जगत में चिंता की लहर पैदा कर दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हो रही है, जिससे उद्योगों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। इस बीच, केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने आर्थिक नीतियों के निर्माण के लिए एक सर्वेक्षण अभियान शुरू किया है, जिसका उद्देश्य उद्योगों से सीधे फीडबैक प्राप्त करना है। जानें इस संकट के प्रभाव और वित्त मंत्रालय की नई पहल के बारे में।
 

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का प्रभाव


अमेरिका और ईरान के बीच दोबारा शुरू हुए हमलों ने आया नकारात्मक संदेश


अमेरिका और ईरान के बीच हाल में हुए हमलों ने उद्योग जगत में चिंता की लहर पैदा कर दी है। डोनाल्ड ट्रंप के लगातार यह कहने के बावजूद कि दोनों देश समझौते के करीब हैं, हाल ही में दोनों देशों के बीच हमलों की खबरें आई हैं।


इस स्थिति ने उद्योगों को चिंतित कर दिया है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, रुपये की कमजोरी, और चालू खाता घाटा (सीएडी) बढ़ने से आयात पर निर्भर व्यवसायों की लागत में वृद्धि हो रही है। इसके अलावा, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच भारत में निजी निवेश की स्थिति भी असमान बनी हुई है।


वित्त मंत्रालय का सर्वेक्षण अभियान

वित्त मंत्रालय की टीम करेगी सर्वेक्षण


केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने पहली बार आर्थिक नीतियों के निर्माण और आगामी बजट की तैयारी के लिए एक व्यापक सर्वेक्षण अभियान शुरू किया है। इस पहल के तहत मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी सीधे विनिर्माण इकाइयों और औद्योगिक क्षेत्रों का दौरा करेंगे।


इसका उद्देश्य उद्योग जगत से सीधे फीडबैक प्राप्त करना और पश्चिम एशिया संकट के कारण उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने के लिए वास्तविकता को समझना है। वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग द्वारा शुरू की गई इस पहल में अधिकतम पांच सदस्यों वाली टीमें बनाई जाएंगी, जिनका नेतृत्व अतिरिक्त सचिव, संयुक्त सचिव या निदेशक स्तर के अधिकारी करेंगे।


ये टीमें विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में दो से तीन दिन का दौरा करेंगी, जिसमें बड़े, मध्यम और छोटे कारखानों के साथ-साथ इंफ्रास्ट्रक्चर, रोजगार और अनुसंधान से जुड़े क्षेत्र भी शामिल होंगे। हर दौरे में कम से कम दो स्टार्टअप्स से मुलाकात करना अनिवार्य होगा। उद्योग संस्था 'भारतीय उद्योग परिसंघ' (सीआईआई) को इन मुलाकातों का आयोजन करने की जिम्मेदारी दी गई है।