पश्चिम एशिया संकट: मानवता की कीमत पर संघर्ष विराम की अपील
संयुक्त राष्ट्र महासचिव की अपील
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने सभी पक्षों से की संघर्ष विराम की अपील
नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच 28 फरवरी को युद्ध की शुरुआत हुई थी। इसके बाद, अप्रैल में अमेरिका ने युद्ध विराम की घोषणा की, जो अब भी लागू है। हालांकि, दोनों पक्षों के बीच स्थायी समाधान की कोई संभावना नहीं दिख रही है। दोनों देशों के बीच स्थायी समझौते के लिए बातचीत फिलहाल ठप है, और अमेरिका ने ईरान द्वारा भेजे गए वार्ता प्रस्ताव को पूरी तरह से अस्वीकार कर दिया है।
इस बीच, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने पश्चिम एशिया में चल रहे संकट पर गहरी चिंता व्यक्त की है, यह कहते हुए कि मानवता इसकी भारी कीमत चुका रही है। उन्होंने सभी पक्षों से संघर्ष विराम को कमजोर करने वाले किसी भी कदम से बचने का आग्रह किया है।
गुटेरेस ने एक पोस्ट में लिखा, "पश्चिम एशिया संकट अपने तीसरे महीने में प्रवेश कर गया है और पूरी मानवता इसकी कीमत चुका रही है।" उन्होंने सभी पक्षों से संघर्ष विराम को बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने और शांतिपूर्ण, व्यापक और स्थायी समाधान की दिशा में बढ़ने का आग्रह किया।
ईरान का नया वार्ता प्रस्ताव
ईरान ने फिर भेजा वार्ता प्रस्ताव
ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत के लिए नया प्रस्ताव पाकिस्तान के माध्यम से भेजा है। ईरानी सरकारी समाचार एजेंसी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। इस कदम से चल रहे युद्ध को समाप्त करने की कोशिशों को नया मोड़ मिल सकता है। हालांकि, प्रस्ताव के बारे में अधिक जानकारी उपलब्ध नहीं है और यह स्पष्ट नहीं है कि यह अमेरिका तक पहुंचा है या नहीं।
इस खबर के बाद वैश्विक तेल कीमतों में थोड़ी गिरावट आई है, क्योंकि इससे तनाव कम होने की उम्मीद जगी है। ईरान द्वारा हॉर्मुज जलडमरूमध्य में नाकेबंदी के कारण दुनिया की लगभग 20% तेल और गैस सप्लाई प्रभावित हुई है। अमेरिका ने ईरानी तेल निर्यात को रोकने के लिए अपनी नौसेना तैनात की है।
ट्रंप के बयान
ईरान के पास दो ही विकल्प बचे : ट्रंप
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर द्वारा दी गई ब्रीफिंग के बारे में पूछे जाने पर, ट्रंप ने संवाददाताओं से कहा कि विकल्प मौजूद हैं। उन्होंने कहा, "क्या हम उन्हें पूरी तरह से तबाह करना चाहते हैं या हम एक समझौता करने की कोशिश करना चाहते हैं?" ट्रंप ने आगे कहा कि मानवीय दृष्टिकोण से वह ऐसा नहीं करना चाहेंगे।