पश्चिम बंगाल चुनाव परिणामों के बाद महुआ मोइत्रा और निशिकांत दुबे के बीच जुबानी जंग
टीएमसी की हार और राजनीतिक बयानबाजी
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणामों ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को सत्ता से बाहर कर दिया है। टीएमसी की हार के बाद राजनीतिक बयानबाजी में तेजी आई है। टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के बीच एक बार फिर से जुबानी जंग देखने को मिली है।
महुआ मोइत्रा का पुराना सोशल मीडिया पोस्ट
हालांकि, दोनों नेता पहले भी संसद और सोशल मीडिया पर आमने-सामने आ चुके हैं, लेकिन इस बार निशिकांत दुबे ने महुआ मोइत्रा पर ऐसा बयान दिया है जिसने राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है। उन्होंने टीएमसी सांसद पर ऐसा तंज कसा है कि उसकी चारों ओर चर्चा हो रही है।
यह विवाद महुआ मोइत्रा के एक पुराने सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ। 1 मई को किए गए अपने पोस्ट में, उन्होंने भाजपा नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा था कि कुछ भाजपा सांसद बंगालियों को बांग्लादेशी और रोहिंग्या कहते हैं, जबकि उनके परिवार के लोग चुनाव प्रचार के दौरान ढाकाई जामदानी साड़ियों की खरीदारी करते हैं।
निशिकांत दुबे का पलटवार
अब जब बंगाल चुनाव के परिणाम आ चुके हैं और भाजपा को प्रचंड बहुमत मिला है, तो निशिकांत दुबे ने महुआ मोइत्रा के उस पोस्ट को शेयर करते हुए उन पर तीखा तंज कसा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि उन्होंने महुआ जी के पोस्ट पर गंभीरता से विचार किया है।
दुबे ने कहा कि सीनियर लीडर पिनाकी मिश्रा उनके पुराने दोस्त हैं, इसलिए अब महुआ मोइत्रा उनकी 'भाभी' जैसी हैं। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है।
जामदानी साड़ी पर कटाक्ष
निशिकांत दुबे ने अपनी पोस्ट में मजाकिया लहजे में कहा कि टीएमसी की हार के बाद उन्होंने बांग्लादेश के नए राजदूत से आग्रह किया है कि महुआ मोइत्रा के लिए ढाका में जामदानी साड़ियों का शोरूम खोला जाए।
उन्होंने लिखा कि इससे लोगों को असली ढाकाई जामदानी साड़ी ढूंढने के लिए किसी से पूछने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उनका यह बयान राजनीतिक तंज के साथ-साथ सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है।
टीएमसी की हार का विश्लेषण
4 मई को आए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव परिणामों में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी को करारी हार का सामना करना पड़ा है। भाजपा ने 207 सीटों पर जीत हासिल की, जबकि टीएमसी केवल 80 सीटों पर सिमट गई। यहां तक कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी भवानीपुर सीट से चुनाव हार गईं। भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें 15 हजार से अधिक वोटों के अंतर से हराया।
पिछले 15 वर्षों से सत्ता में रही ममता बनर्जी को यह हार बर्दाश्त नहीं हुई और उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से भी इनकार कर दिया है।