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पश्चिम बंगाल फलता सीट पर पुनर्मतदान: सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक हलचल

पश्चिम बंगाल की फलता सीट पर पुनर्मतदान की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिसमें सुरक्षा व्यवस्था को दोगुना किया गया है। टीएमसी नेता जहांगीर खान के चुनावी मैदान छोड़ने के बाद राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल गए हैं। बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला हो रहा है, जबकि ईवीएम में छेड़छाड़ के आरोपों के चलते यह सीट विवादों में रही है। जानें इस चुनावी हलचल के बारे में और क्या हो सकता है आगे।
 

पश्चिम बंगाल फलता मतदान: एक बार फिर सुर्खियों में


पश्चिम बंगाल की फलता सीट आज एक बार फिर देशभर में चर्चा का विषय बनी हुई है। कड़ी सुरक्षा के बीच पुनर्मतदान की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, और हर मतदान केंद्र पर सख्त निगरानी रखी जा रही है। पिछले चुनाव में उठे विवादों के कारण इस बार का माहौल और भी संवेदनशील माना जा रहा है।


टीएमसी नेता का चुनावी मैदान छोड़ना

टीएमसी के नेता जहांगीर खान, जिन्होंने मतदान से पहले चुनावी दौड़ से अपना नाम वापस ले लिया, इस समय सबसे अधिक चर्चा का विषय बने हुए हैं। उनके इस निर्णय ने राजनीतिक हलकों में नई बहस को जन्म दिया है, जिससे मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है।


बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला

फलता सीट पर अब बीजेपी के देबांग्शु पांडा और कांग्रेस के अब्दुर रज्जाक मोल्ला के बीच सीधा मुकाबला हो रहा है। इसके अलावा, CPI-M के शंभुनाथ कुर्मी, निर्दलीय उम्मीदवार दीप हाटी और चंद्रकांत राय भी चुनावी मैदान में हैं। पहले 29 अप्रैल को मतदान होना था, लेकिन धांधली और ईवीएम से जुड़ी शिकायतों के कारण चुनाव आयोग ने मतदान रद्द कर पुनर्मतदान का निर्णय लिया।


टीएमसी की स्थिति में बदलाव

जहांगीर खान के चुनावी मैदान छोड़ने के बाद राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल गए हैं। इस स्थिति में बीजेपी की स्थिति को मजबूत माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि बीजेपी फलता सीट पर जीत हासिल करती है, तो यह पश्चिम बंगाल विधानसभा में पार्टी की कुल सीटों को 208 तक बढ़ा देगी, जो राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण संकेत होगा।


सख्त सुरक्षा व्यवस्था का इंतजाम

चुनाव आयोग ने फलता विधानसभा क्षेत्र में मतदान के लिए सुरक्षा व्यवस्था को लगभग दोगुना कर दिया है। 21 मई को पुनर्मतदान हो रहा है, जिसमें 285 मतदान केंद्रों पर वोटिंग जारी है।


केंद्रीय बलों की तैनाती

अधिकारी ने बताया कि फलता विधानसभा क्षेत्र में 285 मतदान केंद्र हैं और सुचारू मतदान सुनिश्चित करने के लिए लगभग 35 कंपनियों के केंद्रीय बल तैनात किए जाएंगे। यह सुरक्षा बलों की तैनाती मूल मतदान दिवस की तुलना में लगभग दोगुनी है।


फलता में पुनर्मतदान का कारण

29 अप्रैल को मतदान के दौरान कुछ बूथों पर ईवीएम में छेड़छाड़ के आरोप लगे थे, जिसके चलते फलता सीट विवादों में आ गई थी। बीजेपी ने इस पर आपत्ति जताते हुए नए चुनाव की मांग की थी, यह कहते हुए कि निर्वाचन क्षेत्र में हो रहे घटनाक्रमों के लिए हस्तक्षेप आवश्यक है।