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पश्चिम बंगाल में अभिषेक बनर्जी के कार्यालय पर बुलडोजर कार्रवाई

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी के कार्यालय पर प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई की है। यह कार्रवाई अवैध निर्माण के आरोप में की गई है, जिसके चलते स्थानीय लोगों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच तनाव उत्पन्न हो गया। प्रशासन का कहना है कि भवन के निर्माण के लिए आवश्यक स्वीकृति नहीं ली गई थी। इस घटना ने राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है, जिससे राजनीतिक बयानबाजी तेज होने की संभावना है।
 

कोलकाता में बुलडोजर कार्रवाई


कोलकाता: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के कार्यालय पर शनिवार को प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई शुरू की। यह कार्रवाई दक्षिण 24 परगना जिले के अमताला बारुईपुर रोड पर स्थित एक पांच मंजिला इमारत पर की जा रही है, जिसे अवैध निर्माण के रूप में देखा जा रहा है। इस कार्यवाही के लिए तीन जेसीबी मशीनों का उपयोग किया गया और सुरक्षा के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया।


प्रशासन का कहना है कि इस भवन के निर्माण के संबंध में पहले भी कई नोटिस जारी किए गए थे। संबंधित पक्ष से आवश्यक दस्तावेज और जवाब मांगे गए थे, लेकिन संतोषजनक उत्तर न मिलने के कारण ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की गई। इससे पहले भी कई संपत्तियों को अवैध निर्माण के लिए नोटिस जारी किए गए थे।


#WATCH | West Bengal: An anti-encroachment drive is being carried out amidst security arrangements around MP Abhishek Banerjee's closed office in Amtala, South 24 Parganas. pic.twitter.com/wFgKgqkRYp

— News Media July 18, 2026



कार्रवाई का समय

शनिवार की सुबह जब बुलडोजर मौके पर पहुंचे, तो स्थानीय लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई। घटनास्थल पर तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के कार्यकर्ता भी मौजूद थे, जिससे कुछ समय के लिए तनाव का माहौल बन गया। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया।


जिला प्रशासन का बयान

जिला प्रशासन का दावा है कि यह भवन बिना आवश्यक स्वीकृति के बनाया गया था और निर्माण से संबंधित वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए। इसी आधार पर इसे अवैध निर्माण की श्रेणी में रखा गया है। अधिकारियों के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया कानूनी प्रावधानों के तहत की जा रही है।


यह कार्यालय विधानसभा चुनाव के परिणामों के बाद से बंद है। ध्वस्तीकरण के दौरान प्रशासन ने आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा घेरा बनाया ताकि किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके। इस कार्रवाई के कारण क्षेत्र में यातायात भी कुछ समय के लिए प्रभावित रहा।


इस कार्रवाई ने राज्य की राजनीति में नया विवाद उत्पन्न कर दिया है। विपक्ष इसे कानून के पालन की कार्रवाई मान रहा है, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने पहले इस तरह के आरोपों को राजनीतिक प्रेरित और तथ्यहीन बताया है। इस मामले पर राजनीतिक बयानबाजी तेज होने की संभावना है।